कोरबा। कोरोना संक्रमण की रोकथाम को लेकर जो कयास लगाए जा रहे थे, वे कुल मिलाकर बेमतलब साबित हो गए। 10 दिन के लॉकडाउन में अब तक की स्थिति में कोरोना संक्रमण के 700 से ज्यादा मामले जिले में मिले हैं। इसमें अकेले 70 फीसदी मामले शहरी क्षेत्र के हैं जबकि 30 फीसदी का वास्ता ग्रामीण क्षेत्र से है। आंकड़ों के आधार पर कहा जा रहा है कि कोरोना की चेन तोडऩे में लॉकडाउन अपनी भूमिका नहीं निभा सका। संभव है कि आने वाले दिनों में संक्रमण का खतरा और भी विस्तारित होगा।
प्रशासन ने पांच नगरीय निकायों और 33 ग्राम पंचायतों में प्रयोग के तौर पर 10 दिवसीय लॉकडाउन प्रभावशील किया है। 23 सितंबर से इसकी शुरुआत हुई। पहले ही दिन एक सैकड़ा से ज्यादा कोरोना संक्रमित पाए गए। अगले दिनों में यह संख्या तेजी से बढ़ती गई। एक मौका ऐसा भी अया जब थोक में 247 मरीज पाए गए। कोरोना पॉजिटिव की संख्या का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। सोमवार को 156 और मंगलवार को 186 मामलों के साथ रिकार्ड लगातार बढ़ता जा रहा है। अब तक की स्थिति में कोरबा जिले में कोरोना के एक्टिव केश 1500 हो गए हैं जबकि कुल संक्रमितों का आंकड़ा 3000 पार हो गया है। यह बात अलग है कि इससे पहले उपचार देने के साथ काफी लोगों को उनके घर का रास्ता दिखा दिया गया है। संक्रमण के मुकाबले राहत क ग्राफ काफी न्यून है और यही सरकारी तंत्र के लिए चिंता का विषय है। 22 मार्च को जनता कफ्र्यू और 24 मार्च से अलग-अलग अवधि में लॉकडाउन जिले में प्रभावशील किये गए। समीक्षा के आधार पर बीच में छूट दी गई। नियमों को शिथिल किया गया। इस दौरान संक्रमण ने अलग-अलग क्षेत्रों से अपनी पहुंच कम्यूनिटी में बनाई। संक्रमितों की संख्या में जिस तेजी से बढ़ोत्तरी हो रही है उसने स्वास्थ्य अमले के साथ-साथ प्रशासन को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है कि आखिर कोरोना की श्रृंखला को तोडऩे के लिए कौन सा तरीका सबसे कारगर होगा। कई स्तर पर मंथन और खोजों के बावजूद ऐसा कोई रास्ता सिस्टम को नहीं मिल सका है जो कोरोना वाहकों में कमी ला सके। यही कारण है कि अब शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लॉकडाउन की आवश्यकता को लेकर लुक्का-चीनी का दौर भी प्रारंभ हो गया है। अलग-अलग कारण से लोग इसे सबसे अव्यवहारिक कदम साबित करने से नहीं चूक रहे हैं।
समस्याओं को बढ़ाने वाला कदम
कहा जा रहा है कि चाहे जो समझकर लॉकडाउन लगाया जा रहा है, इसके अच्छे परिणाम काफी दूर हैं लेकिन समस्याओं की उत्पत्ति इसकी वजह से और ज्यादा हो रही है। कामकाज के अवसर समाप्त हो रे हैं। लोग कई तरह की चुनौतियों से घिरते जा रहे हैं। जरूरी सामानों की कमी हो रही है। अनेक स्थानों पर कृत्रिम संकट पैदा किया जा रहा है और इसकी आड़ लेकर कारोबारी कालाबाजारी के साथ-साथ जमाखोरी पर उतारू हो गए हैं। कुल मिलाकर आम जनता की जेब पर इसका सीधा असर पड़ रहा है।
डॉ. देवनाथ पर भी केरोना का शिकंजा
कोरोना को लेकर अब स्पष्ट धारणा बन चुकी है कि कोरोना किसी का सगा नहीं हो सकता। वह आम से लेकर खास को अपनी चपेट में ले रहा है। बड़े स्तर पर ऐसे उदाहरण सामने आ चुके हैं और अब भी आ रहे हैं। कोरबा में डॉ. के.सी.देवनाथ भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उन्हें उपचार दिया जा रहा है। नगर में अनेक चिकित्सकों ने कई तरह के जोखिम के बीच लोगों को उपचार देना जारी रखा था। जिस तरह से अब चिकत्सक कोरोना की चपेट मे आ रहे हैं उससे चिंता जताई जा रही है कि संबंधित मरीजों को उपचार देने का काम कैसे होगा।