जांजगीर-चांपा। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जिले में नवनिर्मित करीब आधा दर्जन हाईस्कूल भवन हैंडओवर के फेर में खंडहर होने के कगार पर पहुंच गए हैं। नैला, खोखसा और पिसौद के नवनिर्मित इन स्कूलों में जहां बिजली पानी सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी है। वहीं भवन तो बन गया है लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए पक्का मार्ग नहीं है। स्कूलों तक पहुंचने के लिए सड़क नहीं होने के कारण प्राचार्य हैंडओवर नहीं ले रहे हैं।
जिले में मिडिल स्कूलों का उन्नायन कर राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अिभयान के तहत 108 स्कूल खोला गया है। स्कूल खुलने के बाद भवन निर्माण के लिए शासन द्वारा 50-50 लाख की राशि स्वीकृत की गई थी। जिले के करीब 90 स्कूलों में क्लास लगना शुरू हो गया है। वहीं तकरीबन आधा दर्जन स्कूल भवन ऐसे हैं जो 6 साल बाद भी हैंडओवर के इंतजार में हैं। अभियान के तहत नैला, खोखसा, बसंतपुर, सिवनी, कुरियारी, पिसौद, भिलौनी के मिडिल स्कूल का उन्नयन कर करीब 6 साल पहले हाईस्कूल बनाया गया था। बनाने का काम पीडब्ल्यूडी को दिया गया था। भवन में प्लास्टर और बिजली का काम बाकी था।
इस बीच चार साल पहले तत्कालीन सीएम डा. रमन सिंह का जांजगीर प्रवास के दौरान प्राचार्यों को बिना हैंडओवर किए ही लोक निर्माण विभाग द्वारा स्कूल भवन का लोकार्पण करा दिया गया। इन स्कूलों में जहां बिजली पानी सहित मूलभूत सुविधाओं की कमी है। वहीं भवन तो बन गया है लेकिन वहां तक पहुंचने के लिए पक्का मार्ग नहीं है। मिट्टी का कच्चा मार्ग है जो बारिश के चलते कीचड़ में तब्दील हो गया है। विद्यालय तक आने-जाने के लिए रास्ता नहीं होने के चलते प्राचार्य भी हैंडओवर लेने से इंकार कर रहे हैं।
प्राचार्यों ने कलेक्टर व सरपंच से की सड़क बनाने की मांग
हाईस्कूल पिसौद की प्राचार्य ने बताया कि भवन निर्माण का कार्य पूरा हो गया है लेकिन स्कूल तक आने-जाने के लिए मार्ग नहीं है। सरपंच से सड़क बनाने की मांग की गई है। प्राइमरी के दो कमरों में स्कूल संचालित हो रही है। छात्रों की संख्या अधिक होने के कारण परेशानी होती है। स्कूल भवन में बिजली-पानी की भी समस्या है। बरसात की वजह से मार्ग में कीचड़ रहता है, गर्मी के दिनों में स्कूल वहां लगाया जा सकता है। सरपंच से स्कूल तक सड़क बनाने की मांग किए हैं। इसी प्रकार हाईस्कूल खोखसा की प्राचार्य ने भी ग्राम के सरपंच विनोद राज से एप्रोच रोड बनाने की मांग की तो सरपंच ने भी हाथ खड़ा कर दिया। इसके बाद उन्होंने कलेक्टर को पत्र लिखकर सड़क निर्माण कराने की मांग की है।
उधार के भवन में पढ़ते हैं छात्र-छात्राएं
खुद का भवन बन जाने के बाद भी छात्र-छात्राएं प्राइमरी और मिडिल स्कूल की तंग कमरों में बैठकर पढऩे मजबूर हैं। खोखसा के मिडिल स्कूल भवन में हाईस्कूल की 9वीं-10वीं कक्षाएं लगती है। यहां करीब 75 विद्यार्थी अध्यनरत हैं। शासकीय उमावि के प्राचार्य ने बताया कि जगह अभाव के कारण मिडिल की कक्षाएं सुबह की पाली में और हाईस्कूल की कक्षाएं दोपहर की पाली में लगती है। इसी प्रकार पिसौद में प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में 9वीं-10वीं की कक्षाएं लग रही हैं। दो कमरों में 104 छात्र-छात्राएं बैठकर पढ़ते हैं।
आरएमएसए के कुछ भवन हैंडओवर नहीं हो पाए हैं। नविनर्मित स्कूल भवन तक पहुंचने के लिए रास्ता नहीं है, इसके चलते प्राचार्य हैंडओवर लेने से इंकार कर रहे हैं। प्राचार्यो ने सड़क बनाने की मांग की है। सड;क बनवाने के लिए पहल की जाएगी।
डी के कौशिक, डीईओ जांजगीर