समस्यामूलक बन गया शहर का रेलवे फाटक, हर दिन जाम से परेशानी

जांजगीर – चांपा । बलौदा – पंतोरा मार्ग से होकर जिला मुख्यालय आने वाले वाहन चालकों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। नैला फाटक के बंद रहने के चलते हर दिन यहां जाम की स्थिति निर्मित हो जाती है। फाटक में जाम की समस्या आम हो गई है। लोगों को कई बार फाटक खुलने के लिए घंटे भर तक इंतजार करना पड़ता है। नैला फाटक में वायशेप ओवरब्रिज का निर्माण होना है। इसके लिए रेलवे और सेतु विभाग के अधिकारी पिछले पांच साल में पांच बार सर्वे कर चुके हैं मगर इसमें ज्यादातर निजी जमीन और मकान आ रहे हैं। इसके चलते आरओबी निर्माण की प्रक्रिया शुरू नहीं हो पा रही है। ऐसे में आने वाले कई सालों तक लोगों को इस समस्या से निजात मिलने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
जिला मुख्यालय होने के चलते रोजाना बड़ी संख्या में बलौदा, पंतोरा, खिसोरा सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों का आना-जाना जांजगीर लगा रहता है। पूरे दिन भर छोटे सहित बड़े वाहनों की आवाजाही के चलते दबाव बना रहता है। लगातार बढ़ रहे यातायात दबाव के मद्देनजर लोगों द्वारा नैला समपार पर लंबे समय से ओवहरब्रिज निर्माण की मांग की जा रही है, ताकि यहां पर लगने वाले जाम से राहगीरों को मुक्ति मिल सके। नैला रेलवे फाटक में पूरे दिन भर ट्रेनों के गुजरने के चलते अधिकांश समय फाटक बंद होने पर मार्ग के दोनों ओर वाहनों की कतार लग जाती है। कभी – कभी तो लगातार ट्रेन गुजरने पर आधे से एक घंटे तक के लिए फाटक बंद होने पर वाहनों का रेला लग जाता है। फाटक बंद होने के चलते इस मार्ग से आवागमन करने वाले वाहन चालकों को गंतव्य स्थान तक पहुंचने में आधा से एक घंटे का अतिरिक्त समय लग जाता है। नैला समपार में ओवर ब्रिज बनने से जांजगीर – नैला से बलौदा तथा पंतोरा-कोरबा मार्ग पर आवागमन करने वाले वाहन चालकों को समपार पर लगने वालेजाम से छुटकारा मिलेगा और फाटक बंद होने पर उन्हें घंटो खड़े होकर फाटक खुलने का इंतजार भी नहीं करना पड़ेगा।
पांच वर्ष पूर्व भाजपा की सरकार ने समपार के पास ओवरब्रिज निर्माण को लेकर पहल शुरू की थी और सेतु निगम को सर्वे कर रिपोर्ट बनाकर भेजने के लिए कहा था। शासन से निर्देश मिलने पर सेतु विभाग ने सर्वे किया और रिपोर्ट तैयार कर स्वीकृति के लिए भेज दिया था। सर्वे में ज्यादातर निजी मकान और जमीन आरओबी के दायरे में आ रहे हैं। जिसके कारण सेतु और रेलवे के अधिकारियों ने चार से पांच बार सर्वे किया मगर समस्या जस की तस बनी हुई है। हालांकि दो साल पहले वार्षिक निरीक्षण में पहुंचे रेलवे के जीएम ने नैला फाटक पर ओवरब्रिज निर्माण की जानकारी दी थी। मगर अभी तक नैला फाटक में आरओबी निर्माण के लिए कोई पहल नहीं हो सकी है।
तीन से चार गाड़ी गुजरने के बाद खुलता है फाटक
मुंबई – हावड़ा मुख्य रेलमार्ग होने के चलते यहां पूरे दिन ट्रेनों का दबाव बना रहता है। भीषण गर्मी के अलावा बारिश में भी लोगों को फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। गर्मी में बढ़ते तापमान से लोगों का हाल बेहाल रहता है। वहीं दूसरी ओर अधिकांश समय फाटक बंद रहने के चलते राहगीरों को चिलचिलाती धूप में खड़े होकर फाटक खुलने का इंतजार करना पड़ता है। जबकि बारिश के दिनों में भी उन्हें फाटक के पास खड़े होकर खुलने का इंतजार करना पड़ता है। कई बार तो तीन से चार गाडिय़ां गुजरने के बाद ही फाटक खुलता है। तब तक लोगों को इंतजार करना पड़ता है।

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