
लंदन, 0३ नवंबर । लंदन में दो दिवसीय एआई सेफ्टी समिट का आयोजन किया गया। इस समिट में भारत, अमेरिका, चीन समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस समिट में भारत समेत 28 देशों ने एक साथ एआई के खतरे को रोकने के लिए सामने आए। एआई की कार्यशैली पर केंद्रित इस समिट में सभी देशों ने भविष्य में एआई की वजह से डिजिटल टेक्नोलॉजी में होने वाले व्यापक बदलाव पर चर्चा किया।वहीं, इस समिट में दुनिया के नामी-गिरामी एआई डेवलपर्स कंपनियों ने भी शिरकत की। इस समिट में आईए डेवलपर्स इस बात पर सहमत हुए कि कंपनी टेक्नोलॉजी को यूजर्स तक पहुंचाने से पहले एआई मॉडल की सुरक्षा का परीक्षण करने के लिए सरकार के साथ काम करेगी। इससे एआई की वजह से यूजर्स को होने वाले नुकसान से रोकने में मदद मिल सकती है। समिट में कई देशों ने इस बात पर चिंता जाहिर की एआई पर नियंत्रण काफी जरूरी है। लंदन के बैलेचली पार्क में आयोजित इस समिट में अमेरिकी, ईयू, चीन ने एआई के खतरे से निपटने के लिए एक आम दृष्टिकोण साझा करने पर सहमति व्यक्त की। एआई के गॉडफादर कहे जाने वाले योशुआ बेंगियो ने कहा, स्टेट ऑफ द साइंस रिपोर्ट की वजह से भविष्य में एआई से जुड़े खतरों से निपटने में मदद मिलेगी। ब्रिटिश प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने एक बयान में कहा, अब तक नए एआई मॉडल की सुरक्षा का परीक्षण करने वाले एकमात्र लोग इसे विकसित करने वाली कंपनियां हैं। हमें इन कंपनियों पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि एआई पर काम होना चाहिए लेकिन कानूनी तौर पर टेक कंपनियों को जवाबदेह बनाने की आवश्यकता भी है।



























