नई दिल्ली: सरकार ने किसानों को कृषि कानूनों पर एक निश्चित समय के लिए रोक लगाकर कमेटी गठित करने का प्रस्ताव दिया है. सरकार के इस अस्थाई रोक के प्रस्ताव पर किसान नेता कल बैठक करेंगे. किसान नेता हन्नान मोल्लाह ने कहा कि प्रस्ताव पर हम विचार कर सरकार को जवाब देंगे. किसान नेता शिवकुमार कक्का जी ने कहा कि ये विचार करने वाली बात है. हमने कमेटी को मना किया है क्योंकि उस पर भरोसा नहीं है. ये बीच रास्ता निकला है
कल हम इसको लेकर चर्चा करेंगे.

हन्नान मोल्लाह ने कहा, “सरकार ने कहा है कि हम कोर्ट में एफिडेविट देकर क़ानून को 1.5-2 साल तक होल्ड पर रख सकते हैं. कमेटी बनाकर चर्चा करके, कमेटी जो रिपोर्ट देगी, हम उसको लागू करेंगे. हम 500 किसान संगठन हैं, कल हम सबसे चर्चा करके 22 जनवरी को अपना जवाब देंगे.”

वहीं किसान नेता दर्शन पाल सिंह ने कहा, “बैठक में 3 कानूनों और एमएसपी पर बात हुई. सरकार ने कहा हम 3 कानूनों का एफिडेविट बनाकर सुप्रीम कोर्ट को देंगे और हम 1-1.2 साल के लिए रोक लगा देंगे. एक कमेटी बनेगी जो 3 क़ानूनों और एमएसपी का भविष्य तय करेगी. हमने कहा हम इस पर विचार करेंगे.” बता दें कि आज सरकार और किसान संगठनों के बीच 10वें दौर की बैठक हुई. अब अगले दौर की बैठक 22 जनवरी को दोपहर 12 बजे विज्ञान भवन में होगी.

10वें दौर की बैठक के बाद कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, “आज हमारी कोशिश थी कि कोई निर्णय हो जाए. किसान यूनियन क़ानून वापसी की मांग पर थी और सरकार खुले मन से क़ानून के प्रावधान के अनुसार विचार करने और संशोधन करने के लिए तैयार थी. सुप्रीम कोर्ट ने कुछ समय के लिए कृषि सुधार क़ानूनों को स्थगित किया है. सरकार 1-1.5 साल तक भी क़ानून के क्रियान्वयन को स्थगित करने के लिए तैयार है. इस दौरान किसान यूनियन और सरकार बात करें और समाधान ढूंढे.”