सवाल ड्यूटी का, कई थानों में स्टाफ के कम होने से दिक्कतें

कोरबा। विधानसभा चुनाव में प्रशासन के साथ-साथ पुलिस की ड्यूटी काफी मायने रखती है। कोरबा जिले में अनेक पुलिस अधिकारियों और जवानों की ड्यूटी चुनाव के सिलसिले में अलग-अलग क्षेत्रों में लगाई गई है। ऐसे में स्टाफ की कमी से पुलिस थाना और चौकियां जूझ रही है। इसका असर नियमित कार्य संपादन पर पड़ रहा है।
कोरबा समेत विभिन्न क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां तेज हैं। यहां-वहां होने वाली राजनीतिक सभाओं, रैलियों में पुलिस की ड्यूटी लगातार लगाई जा रही है। अत्यावश्यक सेवा और अनुशासन से जुड़े हुए पुलिस अधिकारी और कर्मी को हर हाल में ड्यूटी करनी है। आदेश का परिपालन करने के साथ संबंधितों को जगह पर रवाना किया जा रहा है। आलम यह है कि जिले में इन सब कारणों से अनेक थानों में स्टाफ सिमटकर रह गया है और प्रभारी व इक्का-दुक्का कर्मियों के भरोसे जिम्मेदारियां आ गई है। खबर के मुताबिक विभिन्न थानों के स्टाफ एक पखवाड़े से लगातार एक जगह से दूसरी जगह चुनावी ड्यूटी करने में व्यस्त हैं। उन्हें हर हाल में काम करना है, वे इससे गुरेज नहीं करते लेकिन मुसीबत इस बात की है कि लगातार एक जगह से दूसरी जगह आने-जाने के चक्कर में उनके पास इतना समय नहीं बचता कि यूनिफार्म की धुलाई हो सके। इस चक्कर में अत्यंत विषम हालात में उन्हें सेवा देने को मजबूर होना पड़ रहा है। इसका सीधा असर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। अधिकारियों को भी इस बारे में पूरी जानकारी है लेकिन उनके हाथ बंधे हुए हैं। पुलिस कर्मियों से जुड़ा यह मामला मानवीय संवेदनाओं से भी जुड़ा हुआ है इसलिए निर्वाचन विभाग व प्रशासन को कम से कम संबंधित बिंदुओं पर गंभीरता से विचार करने के बारे में सोचना चाहिए।
अवकाश का मामला अटका
नाम के लिए पुलिस की सेवा अन्य सरकारी कर्मचारियों से अलग मानी जाती है। उनके साथ अनुशासन का तमगा जुड़ा हुआ है। इस चक्कर में उन्हें साप्ताहिक अवकाश की सुविधा का मामला काफी वर्षों से अटका हुआ है। बीते वर्षों में इसे लेकर पुलिस परिवारों ने मोर्चा खोला था लेकिन इसके कोई खास नतीजे नहीं आ सके।

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