कोरबा। पर्यावरण की सुरक्षा के लिए वनों की भूमिका प्रमुख मानी जाती है। इसलिए वनों पर होने वाला आघात मानव जीवन को भी नुकसान पहुंचाता है। इसलिए वन संरक्षण काफी महत्वपूर्ण है। परंतु वन संरक्षण के नाम पर चलाए जा रहे आधारहीन कार्यक्रमों से वनों का संरक्षण तो कम हो रहा है, उल्टा शासन की बहुत बड़ी धनराशि लापरवाही और भ्रष्टाचार का शिकार हो जाती है।
वनों की सुरक्षा के लिए लगभग हर गांव में वन सुरक्षा समितियों का गठन किया गया है। वन अमले एवं सुरक्षा समितियों की लापरवाही एवं भ्रष्टाचार के कारण वनो का विनाश होने से जिले में वन परिक्षेत्र लगातार घटता जा रहा है। विभिन्न कारणों से वनों को होने वाले नुकसानों की भरपायी के लिए शासन के द्वारा प्रतिवर्ष करोड़ों रूपए खर्च कर वृक्षारोपण का सतत कार्यक्रम चलाया जाता है। आज तक वृक्षारोपण के नाम पर जितनी बड़ी धनराशि खर्च की जा चुकी है, उससे तो एक छोटा सा उपवन तैयार हो सकता था। परंतु लापरवाही एवं भ्रष्टाचार के कारण वृक्षारोपण कार्यक्रम के अपेक्षित परिणाम नजर नहीं आते। इस कार्यक्रम में मनरेगा अमले की भागीदारी के बाद भ्रष्टाचार और लापरवाही की गति तेज हो गई। है। इसी कारण शासन के प्रयासों के बावजूद जिले में वनो का दायरा घटता जा रहा है। जबकि वन परिक्षेत्र को पर्यावरण की संजीवनी माना जाता है।