कोरबा (तरूण छत्तीसगढ़)।
जिले के दीपका पुलिस थाना क्षेत्र में संचालित पूर्व सैनिकों के माइनिंग कैम्प में आए लूटेरों ने सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाने के साथ 31 लाख रूपए की रकम लूट ली और फरार हो गए। इससे पहले उन्होंने खिडक़ी की रॉड तोडक़र एक ड्रायव्हर सहित दो कर्मियों को घायल कर दिया। पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए डॉग स्क्वाड और फोरसिक एक्सपर्ट को लगाया है। कई थानों के टीआई और क्राइम ब्रांच मेें पहले काम कर चुके जानकार भी कई एंगल से मामले को देख रहे है।
कोरोना काल खण्ड में कई तरह की चुनौतियों के बीच अपराधिक घटनाओं के बढ़ते क्रम से पुलिस की परेशानी में इजाफा हो गया है। दीपका थाना क्षेत्र में हुई इस घटना को लेकर जानकारी मिली कि आर्यनकोल बेनिफिकेशन का माईनिंग कैम्प यहां संचालित है। इसमें कर्मियों को रखे जाने के साथ उनके लिए जरूरी व्यवस्थाएं की गई है। रात्रि में सुरक्षाकर्मी और अन्य लोग मौके पर मौजूद थे। मध्य रात्रि 1 बजे के बाद यहां लूट की घटना में एक ड्रायव्हर सहित दो कर्मियों को चोंटे आयी। लूटेरे नकाब लगाकर पहुंचे थे। सीआईएसएफ कैम्प के पास हुई इस घटना को लेकर बताया गया है कि लूटेरे वाटर फिल्टर प्लांट से यहां तक पहुंचे। संभवत: उनके पास इसका रोड मैप था। आरोपियों ने घटना स्थल पर तोडफ़ोड़ करने के साथ खिडक़ी रॉड से दो कर्मियों को घायल कर दिया। इसके साथ ही सुरक्षाकर्मियों को बंधक बनाने के बाद कार्य स्थल पर रखी 31 लाख रूपए की रकम लूट ली और फरार हो गए। रात्रि में इस घटना के बारे में कैम्प के कर्मियों ने अपने प्रबंधन को जानकारी दी। जिसके बाद पुलिस को इसकी खबर हुई। जानकारी मिली की रात्रि 3 बजे के लगभग पुलिस हरकत में आई और यहां का जायजा लिया। मौके से सब्बल, रॉड और अन्य सामान मिले है। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि किसी संगठित गिरोह की भूमिका इस घटना क्रम में रही है। वे कितनी संख्या में यहां पहुंचे, इसका पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
घटना की बारीकी से जांच करने के लिए आज सुबह जिले के एसपी अभिषेक मीणा, एएसपी कीर्तन राठौर पूरे अमले के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। मामले की जांच पड़ताल के लिए फोरेसिंक एक्सपर्ट की सेवाएं ली गई है। कोरबा से डॉग स्क्वाड यहां पहुंचा। प्रशिक्षक ने संबंधित क्षेत्र में उसे घुमाया। घटना स्थल के साथ वह वाटर फील्टर प्लांट के आगे तक पहुंचा और इसके जरिए पुलिस को महत्वपूर्ण सुराग दे दिये। जिला पुलिस ने दर्री सीएसपी केएल सिन्हा, कटघोरा एसडीओपी पटेल, कोतवाली टीआई दुर्गेश शर्मा, दीपका टीआई हरीश दांडेकर सहित कई थाना प्रभारी और क्राइम ब्रांच के लिए पूर्व में काम कर चुकी टीम को अहम जिम्मेदारी दी है। बताया गया कि लूट और डकैती की पिछली घटनाओं में शामिल रहे आरोपियों की कुण्डली को खंगालने का काम भी किया जा रहा है।
सीसीटीव्ही लगा जरूर पर काम का नहीं
कोयलांचल में लूट की वारदात होने के मद्देनजर जांच पड़ताल के लिए कई बिंदुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। घटना स्थल के पास सुरक्षा कारणों से सीसीटीव्ही की व्यवस्था काफी समय से की गई है। पुलिस ने हालियां घटना को लेकर जब इसकी सहायता लेनी चाही तो मालूम चला की सीसी टीव्ही काम ही नहीं कर रहा है। जानकारी यह भी मिल रही है कि कुछ घंटे पहले तक की फूटेज इसमें प्रदर्शित हो रहे है। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि अपराधिक तत्वों ने अपने प्लान को अंजाम देने के लिए तकनीकी बाधा खड़ी कर दी।
वेतन भुगतान के लिए रखी गई थी रकम
अपराधियों के हाथ जो 31 लाख रूपए की रकम लगी है वह अगले कार्य दिवस में कर्मचारियों को भुगतान की जानी थी। मासिक वेतन भुगतान के लिए इसी तरह की प्रक्रिया अपनाई जाती रही है, इस तरह की जानकारी सामने आई है। इन सबके बीच पहली बार इस तरह की वारदात होने से कई सवाल उठ खड़े हुए है। कयास लगाया जा रहा है कि बड़ी रकम को भुगतान के लिए यहां लाए जाने के बारे में सूचना लीक हो गई होगी। हालांकि वास्तविकता जांच के
कई दिशा में हो सकती है जांच
बाद ही उजागर हो सकेगी।

कोलफील्डस में अपराधिक घटनाओं का सिलसिला काफी समय से जारी है। जिस एसीबी के परिसर में यह घटना हुई वह कोयला ट्रांसपोर्ट के क्षेत्र में बीते कई वर्षों से काम कर रही है। कुछ महीने पहले उसके खिलाफ अभद्र प्रदर्शन एक संगठन के द्वारा किया गया था। कुछ समय से इस क्षेत्र में कोयला कबाड़ और डीजल चोर गिरोह सक्रिय है। ये सभी जांच के लपेटे में आ सकते है।