
जांजगीर चांपा । प्रदेश सरकार के द्वारा किसानों को बकाया दो सालों का बोनस उनके खातों में डाला गया है। लेकिन उन किसानों के परिजनों के लिए इस बोनस राशि को पाने भारी मशक्कत करनी पड़ रही है, जिनके बैंक खाते बंद हो चुके हैं, या उक्त जमीन बिक चुकी है या फिर खाताधारक किसान की मौत हो गई है। इसके लिए परिजनों को सत्यापन के नाम पर सोसायटियों और तहसीलों का चक्कर लगाना पड़ रहा है। लेकिन जिले में ऐसे किसानों की संख्या सैकड़ों में होने से निपटारा में समय लग रहा है। जिले में 1 लाख 9817 किसानों के खाते में 198 करोड़ 86 लाख रुपए की राशि सीधे अंतरित हुई है। दरअसल, बोनस की राशि वर्ष 2014 और 15 की है और बोनस की राशि उसी किसानों के बैंक खाते में आई है जिन्होंने उक्त अवधि में धान बेचा था । इधर आठ साल का लंबा समय हो जाने के बाद इस अवधि में कई खाताधारक किसानों की मौत हो चुकी है। वहीं कई किसानों के द्वारा उक्त रकबे की जमीन बेच दी है या किसी कारणवश उक्त खाता बंद कर दिया गया है। ऐसे में सालों बाद उन खातों को फिर से सक्रिय कराने के लिए किसानों को परेशानी हो रही है। हालांकि इसके समाधान के लिए सोसायटियों में शपत्र पत्र के साथ आवेदन की सुविधा दी गई है। इसके बाद उन आवेदनों का तहसीलदार न्यायालय में सत्यापन होने के बाद बोनस की राशि किसानों को मिल रही है लेकिन जटिल प्रक्रिया के चलते किसानों को समितियों में पहले रिकार्ड निकलवाने दौड़-भाग करनी पड़ रही है। इधर आवेदनों की संख्या को देखते हुए राजस्व विभाग के द्वारा समितियों में अब कैंप लगाकर निराकरण में तेजी लाने पहल की जा रही है। इसी कड़ी में शनिवार को जिला मुख्यालय से लगे ग्राम पेण्ड्री के सोसायटी में कैंप का आयोजन किया गया। जहां जांजगीर एसडीएम ज्ञानेन्द्र कुरें, तहसीलदार बजरंग साहू समेत राजस्व अमला पहुंचे। पेण्ड्री समिति में 92 खाताधारकों के साथ इसी तरह की समस्या है जिसको लेकर कैंप में परिजन बड़ी संख्या में पहुंचे थे। यहां आवेदनों को लेकर सत्यापन किया गया।



















