जांजगीर-चांपा । जिले के हाई व हायर सेकेण्डरी स्कूलों में डेस्क और बेंच की सप्लाई की गई है। मगर इस संबंध में स्कूल के प्राचार्यों को भी पता नहीं की यह किसके आदेश पर भेजा जा रहा है। कम मोटाई के स्टील से निर्मित डेस्क और बेंच स्तरहीन हैं। सप्लाई के बाद जो चालान दिया जा रहा है उसमें फर्नीचर और उसकी संख्या का जिक्र तो है मगर रेट का कालम खाली छोड़ दिया गया है। प्राचार्यों से इसकी पावती ली जा रही है जबकि प्राचार्यों ने फर्नीचर के लिए आर्डर दिया है न ही उन्हें इसकी जानकारी है।
जिले के हाई व हायर सेकेण्डरी स्कूलों में इन दिनों रायपुर की अल्फा इंजीनियरिंग एण्ड फेब्रिकेशन वर्क कंपनी द्वारा स्टील के डेस्क बेंच की आपूर्ति की जा रही है। यह आपूर्ति शासन द्वारा होना बताया जा रहा है। इस संबंध में स्कूल के प्राचार्यों को कोई जानकारी नहीं है मगर उन्हें सामान देकर पावती ली जा रही है। उ’च स्तरीय आदेश का हवाला देकर पहुंचाए जा रहे इस फर्नीचर की गुणवत्ता सही नहीं है। कम मोटाई की चादर व पतले एगल से निर्मित यह फर्नीचर Óयादा टिकाऊ नहीं है मगर वित्तीय वर्ष के आखिरी समय में फर्नीचर आपूर्ति का काम धड़ल्ले से चल रहा है। कई प्राचार्यों को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यहां तक जिला शिक्षा अधिकारी भी इससे अंजान हैं। ऐसे में यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा विभाग लाखो रूपए के फर्नीचर आपूर्ति कितनी गंभीरता से कर रहा है। फर्नीचर की गुणवत्ता व आपूर्ति का तरीका देखकर ही यह कहा जा सकता है कि शासन सरकारी राशि के सदुपयोग के लिए कितना गंभीर है।
वित्तीय वर्ष के आखिरी समय में ही होती है आपूर्ति
शिक्षा विभाग में Óयादातर सामान की सप्लाई वित्तीय वर्ष के आखिरी समय में होती है। इससे शासन के बजट खर्च करने की मंशा Óयादा व विद्यार्थियों के सुविधा की मंशा कम दिखती है। फरवरी में फर्नीचर सप्लाई के एक माह बाद परीक्षा व छुट्टी हो जाएगी। ऐसे में विद्यार्थियों को इस फर्नीचर का लाभ अगले सत्र से मिलेगा जबकि इस दौरान कई फर्नीचर क्षतिग्रस्त भी हो जाएगा जबकि जुलाई में इसकी आपूर्ति होने से कम से कम विद्यार्थी इसका शुरूआत से ही उपयोग कर पाते।
इनेसे होती है गड़बड़ी
फर्नीचर की सप्लाई राÓय स्तर पर होती है। यहां पर सीएसआईडीसी के दर पर अनुमोदन और गुणवत्ता परीक्षण के बाद पंजीकृत संस्थाओं से फर्नीचर की सप्लाई करना होता है मगर अधिकारियों की अनदेखी के चलते गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया जाता। जिले में एक करोड़ रूपए से अधिक के फर्नीचर की आपूर्ति हो रही है मगर इसकी गुणवत्ता परखने वाला कोई नहीं है। पूरा खेल कमीशन का होता है इसके चलते सही सामान स्कूलों तक नहीं पहुंचता।
नहीं होती रिपेयरिंग
जो फर्नीचर सप्लाई होती है टूट फट पर उसकी मरम्मत नहीं कराई जाती जबकि वेल्डिंग कराकर इन फर्नीचर को फिर से उपयोग के लायक बनाया जा सकता है मगर इस दिशा में किसी का ध्यान नहीं जाता और स्कूलों में एक बार टूटने के बाद उसकी मरम्मत नहीं की जाती।
प्राचार्यों में भय
फर्नीचर के संबंध में प्राचार्य कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। राÓय स्तर से आपूर्ति होने के चलते वे कोई शिकयत नहीं करना चाहते। उन्हें भय है कि अगर शिकवा शिकायत करेंगे तो उनका स्थानांतरण तक हो सकता है। इस तरह प्राचार्य दबाव में भी हैं।
स्कूल में 50 डेस्क व 50 बेंच आया है। राÓय स्तर से आया है या जिला स्तर से इसकी जानकारी नहीं है। सामान आया तो स्कूल में रखा गया है।
पी केआदित्य
प्राचार्य
शासकीय उमावि सिवनी,चांपा
फर्नीचर की सप्लाई राÓय स्तर पर की जा रही है। फर्नीचर गुणवत्ताविहीन होने की जानकारी नहीं मिली है। अगर ऐसी शिकायत है तो जानकारी ली जाएगी।
एस स तोमर
डीईओ जांजगीर-चांपा