रांची, २० जनवरी [एजेंसी]।
सरकार ने झारखंड राज्य पत्रकार स्वास्थ्य बीमा नियमावली-2021 का संकल्प बुधवार को जारी कर दिया। जारी संकल्प के अनुसार इस बीमा योजना का लाभ बीमित पत्रकार के अलावा उनके पति-पत्नी व 21 वर्ष तक के आश्रित दो अविवाहित बच्चों को मिलेगा। इस नियमावली के तहत कुल पांच लाख रुपये तक का बीमा होगा। इसके लिए एक बीमा कंपनी से राज्य सरकार एमओयू करेगी। इसके लिए प्रीमियम की जो राशि निर्धारित होगी, उसका 80 फीसद राज्य सरकार व 20 फीसद लाभुक पत्रकार को देना होगा। इसपर सरकार का अनुमान है कि राज्य सरकार का प्रति वर्ष दो करोड़, 22 लाख 40 हजार 640 रुपये खर्च होंगे।इसके तहत व्यक्तिगत दुर्घटना में पांच लाख रुपये तथा ग्रुप मेडिक्लेम के तहत सभी बीमित के इलाज के लिए पांच लाख रुपये तक की चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी। यह लाभ वैसे पत्रकारों को मिलेगा, जो कम से कम स्नातक पास होंगे और जिनके पास पत्रकारिता के क्षेत्र में कम से कम पांच वर्ष का अनुभव होगा। बीमा की अवधि एक वर्ष के लिए होगी। प्रत्येक वर्ष इसका नवीनीकरण होगा।राज्य सरकार ने जारी संकल्प में बताया है कि पत्रकार स्वास्थ्य बीमा का लाभ पत्रकारिता छोडऩे वालों को नहीं मिलेगा। बीमाधारक की उम्र 21 से 60 वर्ष के बीच होना चाहिए। इलाज या दुर्घटना की सूचना सूचना एवं जन संपर्क विभाग तथा बीमा कंपनी को अधिकतम सात दिनों के भीतर देना अनिवार्य होगा, तब ही लाभ मिल सकेगा। बीमा के लिए नोमिनी का पूरा विवरण देना अनिवार्य है। आवेदक के पास कोई बीमा योजना या मेडिक्लेम पहले से चल रहा है तो उसका भी आवेदन में जिक्र करना होगा।
ईशनिंदा के संदेश भेजने पर पाक में कोर्ट ने महिला को सुनाई मौत की सजा
इस्लामाबाद। अलग हो चुके अपने पुरुष मित्र को ईशनिंदा के संदेश भेजने के लिए पाकिस्तान की एक अदालत ने बुधवार को एक महिला को मौत की सजा सुनाई। फारूक हसनत ने अनिका अतीक के खिलाफ 2020 में शिकायत दर्ज कराई थी। इसी शिकायत पर रावलपिंडी की अदालत ने अनिका को दोषी ठहराया थाफारूक हसनत ने उस पर ईशनिंदा, इस्लाम का अपमान करने और साइबर अपराध कानूनों का उल्लंघन करने के आरोप लगाए गए थे। मामले के विवरण के अनुसार, अनिका और फारूक दोस्त हुआ करते थे, लेकिन दोनों के बीच मतभेद पैदा हो गए। इससे नाराज अनिका ने फारूक को वाट्सएप पर ईशनिंदा के संदेश भेज दिए। फारूक ने इन संदेशों को डिलीट करने को कहा, लेकिन अनिका ने इन्कार कर दिया। लिहाजा, फारूक ने संघीय जांच एजेंसी की साइबर अपराध शाखा में उसके खिलाफ शिकायत दर्ज करा दी। शुरुआती जांच के बाद जांच एजेंसी ने अनिका को गिरफ्तार कर लिया और फिर उस पर मुकदमा चलाया गया। 1980 के आसपास सैन्य तानाशाह जनरल जियाउल हक के शासनकाल में पाकिस्तान में ईशनिंदा कानून बनाया गया था। हालांकि अभी तक इस कानून के तहत किसी को मौत की सजा नहीं दी गई है, लेकिन महज ईशनिंदा करने के संदेह में देश में कई लोगों की हत्या की जा चुकी है।

Previous articleकोविशील्ड, कोवैक्सीन को खुले बाजार में बेचने की अनुमति देने की सिफारिश, एसईसी ने दिखाई हरी झंडी
Next articleसपा को एक और झटका: अपर्णा के बाद मुलायम सिंह यादव के साढ़ू पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता होंगे भाजपा में शामिल