कोरबा। कुसमुंडा क्षेत्र में आवासीय परिसर के पीछे खाली पड़ी जमीन में बेजा कब्जाधारियों की नजर लग गई है। एसईसीएल प्रबंधन के लगाए गए पेड़ों को काट कर न केवल कब्जा किया जा रहा है, बल्कि जमीन को बेच रहे हैं। प्रबंधन के कार्रवाई नही करने से पूरा ग्रीन बेल्ट एरिया खत्म होने की स्थिति में पहुंच गया है।
साउथ इस्टर्न कोलफिल्डस लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा खदान में कार्यरत कर्मियों के लिए विभागीय तौर पर आवास परिसर बनाए गए हैं। इन आवासों के पीछे खाली पड़ी जमीन में प्रबंधन ने पौधे लगाकर ग्रीन बेल्ट विकसित किया था। वर्तमान में सभी पौधे पेड़ बन चुके हैं। ग्रीन बेल्ट के दूसरी तरफ कुसमुंडा- कोरबा फोरलेन सडक़ बनाई जा रही है। इसलिए लोगों की नजर इस ग्रीन बेल्ट पर टिक गई है। जमीन कब्जा करने में न केवल बाहरी लोग सक्रिय हो गए हैं, बल्कि विभागीय कर्मी भी अपने मकान के पीछे अतिरिक्त बाउंड्रीवाल खड़ा कर कब्जा कर रहे हैं और पेड़ों की कटाई कर रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से बेजा कब्जा बढऩे पर प्रबंधन को भी जानकारी दी गई है, पर प्रबंधन ने कोई कार्रवाई नहीं की। इससे बेजा कब्जा तेजी के साथ बढ़ गया है। बताया जा रहा है कि सेवानिवृत्त कर्मचारी ही इस काम में जुटे हुए हैं। कुसमुण्डा क्षेत्र के विकास नगर में चर्च कांपलेक्स से लेकर शिवमन्दिर चौक तक बीते वर्ष मुख्य सडक़ के समानान्तर दूसरी सडक़ को ऊंचा कर गिट्टी, मिट्टी व मुरुम डाल कर वाहनों के आवागमन के लिए बनाया गया था। इस मार्ग की वजह से विकासनगर कालोनी के बी टाइप आवासीय परिसर में रहने वालों ने कब्जा करना शुरू किया। रिटायरमेंट के बाद कई कर्मियों ने इस जमीन को दूसरों को बेच भी दिया है। कुसमुंडा रेलवे साइडिंग से उडऩे वाली धूल से विकास नगर कोलोनी को सुरक्षित रखने इसी जमीन एसईसीएल प्रबंधन ने ग्रीन बेल्ट विकसित किया था। पेड़ की वजह से आवासीय परिसर में धूल व कोयला प्रदूषण से राहत मिलने लगी थी, पर पेड़ कटाई की वजह से पुन: प्रदूषण फैलने लगा है। रेलवे साईडिंग में मालगाड़ी में कोयला लोडिंग व सडक़ पर भारी वाहनों की आवाजाही से धूल व कोयला डस्ट घरों तक पहुंचने लगी है। पिछले दिनों महिलाओं ने इसका विरोध कर जीएम कार्यालय का घेराव भी किया था।