हर दिन 1.5 मैट्रिक टन राख का दबाव

कोरबा। छत्तीसगढ़ के लिए सबसे ज्यादा बिजली उत्पादन का काम कोरबा जिले में हो रहा है। सहयोगी के रूप में जांजगीर-चंापा, रायगढ़ जिले की भूमिका दर्ज हो रही है। अकेले कोरबा जिले में 13 बिजली घर संचालित हो रहे है। यहां हर रोज लगने वाले कोयला से उत्सर्जित राखड़ अपने आप में बड़ी समस्या बनी हुई है। राख के परिवहन से उत्पन्न होने वाली चुनौति का सीधा असर पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
घरेलु और व्यवसायिक जरूरत की पूर्ति के लिए कोरबा जिले में केन्द्रीय, प्रदेश और निजी उद्योगों के द्वारा संचालित किये जा रहे है। बिजली घरों की संख्या 13 है। आंकड़ों पर जाए तो पड़ोस के दो जिलों में 17 और प्लांट संचालित हो रहे है। इस तरह से इनकी कुल संख्या 30 होती है। यहां से हर दिन बिजली उत्पादन का काम जारी है। इसकी मात्रा 25 हजार 732 मेगावाट के आसपास है। इस काम पर एसईसीएल की खदानों से मिलने वाला 7 लाख टन कोयला अपनी भूमिका निभाता है। हर वर्ष कोयला से निकलने वाली राख 45 मिट्रिक टन होती है। कोरबा जिले में राख परिवहन को लेकर जो समस्या बनी हुई है, उसका मसला काफी पुराना है। एनटीपीसी, सीएसईबी, बालको से बड़ी मात्रा में निकलने वाली राख के लिए जो ऐशडाइक बनाये गए हैं वे खुद समस्याग्रस्त हैं। जबकि सरकार के निर्देश पर बिजली घरों से निकलने वाली राख के शत प्रतिशत उपयोग करने का काम अलग-अलग स्तर पर होना है। इसे लेकर कई प्रकार की परेशानियां है। इन सबसे अलग हटकर प्रतिदिन 1.5 मेट्रिक टन राख का परिवहन कोरबा व अन्य क्षेत्रों में कराया जा रहा है। हजारों की संख्या में वाहन इस काम में नियोजित किये गए हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि सुरक्षा के जिस मापदंडों के अनुसार इस काम को किया जाना है उसकी अनदेखी की जा रही है। एनजीटी के गाईड लाईड में साफ तौर पर कहा गया कि राखड़ परिवहन खुले वाहन में नहीं किया जाए। कुल मिलाकर इस काम को कवर्ड और मकैनिकल डिजाईन वाहनों में ही होना चाहिए। इन सबसे हटकर खुले वाहन और उनमें भी बिना ढके राखड़ परिवहन का काम दिन और रात में हो रहा है जो इस बात को दर्शाता है कि ट्रांसपोर्ट कारोबारियों को किसी का खौफ है ही नहीं। क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि बिजली घरों से निकलने वाली राख में कई तरह के रसायनिक तत्व होते हैं जो अपने गुणधर्म के कारण पर्यावरण और जनस्वास्थ्य पर बूरा असर डालते हैं। बीते कई दशक से राख परिवहन का काम आबादी वाले इलाके से जारी होने के कारण स्वाभाविक रूप से कई प्रकार की समस्याएं यहां कायम है। सबसे बड़ी बात यह है कि बिजली उत्पादन से भारी भरकम कमाई करने वाले उद्योग अपने हित की पूर्ति कर रहे हैं। व्यवसायिक उपभोक्ताओं की जरूरत पूरी हो रही है लेकिन पूरी प्रक्रिया से जो नुकसान हो रहे हैं उनका हकदार बिना किसी वजह से जनता बन रही है।

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