
जांजगीर-चांपा। तेज रफ्तार वाहनों की कहर से आए दिन लोगों की जान चली जा रही है। अब अज्ञात वाहनों से दुर्घटना (हिंट एंड रन ) के मामलों में मृतक के आश्रितों को दो लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा। वहीं, गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में 50 हजार रुपये का भुगतान किया जाएगा। पहले मृत्यु के मामले में यह राशि 25 हजार रूपए थी।
पुलिस मुख्यालय नया रायपुर से इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक यातायात द्वारा सभी एसपी को परिपत्र जारी कर हिट एंड रन मामलों में मुआवजा भुगतान के लिए नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा है। अज्ञात वाहनों से दुर्घटना के मामले में कलेक्टर के स्तर से स्वीकृति प्रदान की जाएगी। इसके लिए समिति गठित होगी । समिति की अनुशंसा के बाद साधारण बीमा परिषद (जीआइसी) द्वारा सीधे आश्रितों के बैंक खाते में मुआवजा राशि का भुगतान कर दिया जाएगा। मुआवजे के लिए आवेदन करने और पीड़ितों को भुगतान जारी करने की प्रक्रिया के लिए समय सीमा भी तय की गई है। इसके अनुसार मृतक के वैध उत्तराधिकारी द्वारा आवेदन एसडीएम या तहसीलदार कार्यालय में प्रस्तुत किया जाएगा। एक महीने के भीतर इसमें जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होगा। जिला स्तर पर गठित समिति द्वारा रिपोर्ट प्राप्त होने के 15 दिन के भीतर साधारण बीमा परिषद (जीआइसी) को भुगतान का आदेश दिया जाएगा और आदेश जारी होने के 15 दिन बाद मृतक या घायल के निकटतम वारिश को नियमानुसार यह राशि दी जाएगी। राशि संबंधित के बैंक खाते में जमा होगी। हिट एंड रन वाहन दुर्घटना मामले में एसडीएम या तहसीलदार दावा जांच पदाधिकारी होंगे, जबकि जिला पदाधिकारी दावा निपटान आयुक्त होंगे। दावा जांच पदाधिकारी से रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद दावा निपटान आयुक्त दावे को मंजूर करेंगे। यदि दावा सही पाया जाता है तो दावा निपटान आयुक्त मुआवजे की राशि स्वीकृत कर सामान्य बीमा परिषद को स्वीकृति आदेश भेजेंगे। इस आदेश प्राप्ति के15 दिवस की अवधि में सामान्य बीमा परिषद संबंधित के खाते में राशि का भुगतान करेगी। हिट एंड रन मामलों में दुर्घटना के बाद टक्कर मारने वाला व्यक्ति अपनी गाड़ी के साथ मौके से फरार हो जाता है। ऐसे मामलों को हिट एंड रन की श्रेणी में रखा जाता है। केंद्रीय परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने ऐसे मामलों में मुआवजा देने को लेकर सभी राज्यों को निर्देश जारी किया था। इसके बाद राज्य स्तर पर परिषद बनाकर इसे लागू किया जा रहा है। हिट एंड रन मामलों में मुआवजा के लिए जिला स्तर पर समिति गठित होगी। जिसमें क्लेम सेटलमेंट कमिश्नर जो संबंधित जिले के कलेक्टर होंगे वे समिति के अध्यक्ष रहेंगे। क्लेम जांच अधिकारी राज्य सरकार द्वारा मनोनित अधिकारी समिति के सदस्य होंगे। इनके अलावा जिले के एसपी या डीएसपी हेड क्वाटर , सीएमएचओ, आरटीओ अधिकारी या अन्य अधिकारी जो राज्य शासन द्वारा नामित हो तथा ऐसे अशासकीय स्वयंसेवी संगठनों के कोई सदस्य जो सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में कार्य करते हैं ये सभी समिति के सदस्य होंगे। जनरल इंश्योरेंश काउंसिल द्वारा नामित कोई अधिकारी समिति के सदस्य सचिव होंगे। जिले में सड़क दुर्घटना लगातार बढ़ रही है। कई मामलों में वाहन चालक दुर्घटना के बाद वाहन सहित फरार हो जाते हैं। जिससे दुर्घटनाकारित वाहन का नंबर व चालक का नाम व पता की जानकारी नहीं हो पाती। ऐसे मामलों में मृतक या गंभीर रूप से घायल व्यक्ति क्लेम भी नहीं कर सकते। इस तरह के मामलों में यह योजना उपयोगी होगी।



























