हीरो बनना मेरे लिए एक सपना था : ताहिर राज भसीन

एक्टर ताहिर राज भसीन की हिट सीरीज ये काली काली आंखें ने उनके स्क्रीन पर हिंदी फिल्म हीरो की भूमिका निभाने के सपने को साकार किया। ताहिर राज भसीन ने कहा, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसका इंडस्ट्री से कोई लेना-देना नहीं है, मेरे लिए किसी प्रोजेक्ट में हीरो बनना और किसी फिल्म या सीरीज का टाइटल अपने कंधों पर रखना एक सपना था। मैं वास्तव में निर्देशक सिद्धार्थ सेन गुप्ता और ये काली काली आंखें की पूरी टीम का आभारी हूं कि उन्होंने मुझमें एक्टर बनने की आग देखी और मुझ पर एक फ्रंट-फुटेड हीरो बनने का भरोसा किया। उन्होंने आगे कहा, ये काली काली आंखें ने मुझे हीरो के रूप में लोगों का मनोरंजन करने में सक्षम बनाया जो रोमांस कर सकता है, जो जरूरत पडऩे पर आगे बढ़ सकता है, लड़ सकता है और वह व्यक्ति भी हो सकता है जिसने सभी मेजर प्लॉट प्वाइंट्स को ट्रिगर किया है!
सिल्वर स्क्रीन के हीरो को अपना आदर्श मानने वाले किसी व्यक्ति के लिए यह एक ऐसा क्षण था जो अभी भी मेरे लिए सपने जैसा है। मैं इस प्रोजेक्ट का ऋणी हूं। अभिनेता ने आगे कहा कि एक हिट फिल्म या सीरीज का होना हमेशा एक बड़ा प्लस होता है क्योंकि नियति हर रिलीज के साथ लिखी और दोबारा लिखी जाती है। मैं इस बात से रोमांचित हूं कि ये काली काली आंखें ने मेरे लिए कितने दरवाजे खोल दिए हैं। मुझे खुशी है कि मैं लोगों का मनोरंजन कर सका और मेरे काम और शो के लिए प्रतिक्रिया और सराहना सकारात्मक थी। यह मेरे लिए अधिक ऊंचाइयां हासिल करने की दिशा में एक कदम था। उन्होंने आगे कहा, ये काली काली आंखें की सफलता ने मुझे स्क्रीन पर विविधता लाने और अधिक एक्सपेरिमेंट करने के लिए प्रेरित किया और मुझे प्रोजेक्ट में हीरो को बनने के लिए अधिक ऑफर मिले!
रणदीप हुडा ने वीर सावरकर के नाम पर वीर रखा अपने नवजात घोड़े का नाम
एक्टर रणदीप हुडा ने पुणे से लौटते समय मुंबई और लोनावाला के बीच स्थित अस्तबल में अपने घोड़े से मुलाकात की। रणदीप अपने पुराने घोड़े रोमेल से मिले, उनकी घोड़ी ड्रीम गर्ल, जिसके बच्चे होप का नाम रणदीप की मां आशा के नाम पर रखा गया है, के पास एक शिशु नर घोड़ा था, जिसे रणदीप ने पहली बार देखा था। रणदीप बच्चे के साथ खेले और उसकी हृष्ट-पुष्टता, शालीन एथलेटिक्स और स्वभाव को देखकर क्रांतिकारी वीर सावरकर के नाम पर उनका नाम वीर रख दिया। जब उनसे पूछा गया कि क्या नाम उनकी नवीनतम फिल्म वीर सावरकर से प्रेरित है, तो रणदीप ने साझा किया, आखऱिकार मुझे अपनी ड्रीम गर्ल के नए बच्चे को देखने का समय मिल गया.. वह बहुत प्यारा, एथलेटिक और शर्मीला है.. उसका नाम वीर रखा.. मेरी आशा की दूसरी किरण बहुत बड़ी हो गई है। वह बहुत भूरी और सुंदर हो गई है। मेरे रिटायर योद्धा रोमेल फार्म में भी एक अच्छा जीवन जी रहे हैं.. मैं धन्य महसूस कर रहा हूं।

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