अध्यक्ष पर भरोसा नहीं, अविश्वास प्रस्ताव के लिए दिया आवेदन

सक्ती । भाजपा की सरकार छत्तीसगढ़ में बनते ही जहां एक ओर भाजपाइयों में नया जोश दिखने लगा है। सक्ती नगर पालिका में भी भाजपा पार्षदों ने अध्यक्ष के विरूद्ध मोर्चा खोलते हुए शुक्रवार को कलेक्टर को अविश्वास प्रस्ताव की सूचना दी।कांग्रेस शासन काल में अविश्वास प्रस्ताव को लेकर बन रही रणनीति को अब भाजपाई अंजाम तक पहुंचाने में लग गए हैं। इसी आशय का ज्ञापन कलेक्टर सक्ती नूपुर राशि पन्ना को भाजपा के पार्षदों ने सौंपा है ।
5 पार्षदों ने नगर पालिका अध्यक्ष सुषमा दादू जायसवाल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की सूचना देकर अध्यक्ष पर अनियमितता को लेकर कई आरोप लगाए हैं। इसकी खबर मिलते ही नगर में राजनीतिक चर्चाएं भी शुरू हो गई है। वहीं पार्षदों में भी खेमे बंदी की सुगबुगाहट है। विरोधी पक्ष जहां अध्यक्ष को हटाने एढी चोटी एक करेंगे। वहीं अध्यक्ष अपनी कुर्सी बचाने पूरा प्रयास करेंगी। अविश्वास प्रस्ताव की सूचना देने वालों में वार्ड नंबर 6 की पार्षद रजनी संजय रामचंद्र , पार्षद सरला गोविंदा निराला, गजेंद्र यादव, विजय लखन देवागंन, धनंजय नामदेव का हस्ताक्षर है।
क्या है अविश्वास प्रस्ताव के ज्ञापन में
अविश्वास की सूचना के लिए जो लिखित ज्ञापन दिया गया है उसमें कहा गया है कि अध्यक्ष द्वारा पीआईसी की बैठक एवं परिषद् की बैठक में जनहित के कार्य को ध्यान में न रखकर स्वहित के कार्य के ज्यादा ध्यान दिया जाता है। नगर पालिका में इनके पद पर रहते हुए साफ सफाई, पेय जल, एवं विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। नगर पालिका के अधिकांश सयंत्रों में इनके पति त्रिलोक चंद जायसवाल के कारखाने से निर्मित संयंत्र नगरीय निकाय में ज्यादा दिखते हैं।
100 करोड़ रूपए की नल जल योजना समय बीत जाने के बाद भी पूर्ण नहीं हो सकी है। नियमों के विपरीत ठेकेदार के द्वारा पूर्णरूप से भ्रष्टाचार करते हुए नगर में निर्माण कार्य जारी है । कार्य की गुणवता निम्न है। 4 वर्षो के आय व्यय का लेखा जोखा परिषद् की बैठक में पार्षदों के द्वारा मांगे जाने पर भी नहीं दिया गया है। मनमाने ढंग से अनुपयोगी मशीनरी की खरीदी कर आर्थिक हानि पहुंचाई गई है। इसलिए हम नगर पालिका अध्यक्ष के विरूध अविश्वास प्रस्ताव लाने विवश हैं।
सफलता तब मिलेगी जब कांग्रेसी पार्षद देंगे साथ
अविश्वास प्रस्ताव को लेकर नगर में जो चर्चा चल रही है उसकी सबसे खास बात यह है कि भाजपा पार्षदों की संख्या वर्तमान समय में केवल 6 है। जबकि अविश्वास प्रस्ताव के लिए कम से कम 13 पार्षदों की आवश्यकता होगी ऐसे में अविश्वास प्रस्ताव का ज्ञापन देने वाले पार्षदों को कांग्रेसी पार्षदों का सहयोग लेना पड़ेगा। बिना क्रास वोटिंग के अविश्वास प्रस्ताव पारित नहीं हो सकता।

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