
एसईसीएल निर्माण पर कर रहा लाखों रुपए खर्च
कोरबा। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का ध्यान अब जाकर नगर की एक मुख्य सडक़ को ठीक कराने पर गया है जो लंबे समय से बदहाली का शिकार रही। इसके नवीनीकरण के लिए एसईसीएल ने डब्ल्यूएमएम तकनीक पर जोर दिया है। इस पर उठ रहे सवालों के बीच प्रबंधन का तर्क है कि अधिकांश सडक़ें इसी तकनीक पर आधारित है इसलिए इसका कोई मतलब नहीं है।
खबर के मुताबिक एसईसीएल के मुड़ापार बेरियर से सीजीएम कार्यालय के नजदीक तक सडक़ का नवीनीकरण कराया जा रहा है। पिछले वर्ष इसके लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी की गई थी। इसके लिए कार्यादेश जारी करने और काम शुरू होने में काफी समय लगा। उसी दौरान तय हो गया था कि इस सडक़ को नए सिरे से बनाने के लिए पुरानी तकनीक के बजाय नई तकनीक का उपयोग होगा। इसलिए अब वेट मिक्स मैकडम (डब्ल्यूएमएम)को अमल में लाया गया है। शहरी क्षेत्र में इस तरह का प्रयोग पहली बार देखने को मिल रहा है। इसलिए इस पर उंगलियां उठ रही है और संदेह जताए जा रहे हैं कि इस तरह की सडक़ आखिर कितने महीने तक टीक सकेगी और लोग उसके बाद फिर क्या करेंगे। इस मामले में एसईसीएल कोरबा क्षेत्र के स्टाफ ऑफिसर सिविल से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि आज की तारीख में अधिकांश सडक़ें इसी तकनीक पर आधारित है। बड़े हिस्सों में इस पर अमल किया जा रहा है इसलिए हम भी अपनी सडक़ों को इसी पैटर्न पर बना रहे हैं। डब्ल्यूएमएम नया फार्मेट है और इसके टिकाऊपन की भी अपनी गारंटी है। मापदंडों के अंतर्गत काम कराया जा रहा है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
सडक़ उखाड़े बिना बिछाई गिट्टी
इस नई सडक़ के निर्माण को लेकर गुणवत्ता संबंधित सवाल भी खड़े हो रहे हैं। सडक़ निर्माण में काम करने का अनुभव रखने वाले लोग बताते हैं कि अनिवार्य रूप से पुराने सडक़ को पूरी तरह उखाडऩे के साथ ही नया काम करना होता है तब कहीं जाकर पकड़ मजबूत होती है। इस इलाके में जो काम चल रहा है उसमें पुरानी सडक़ के ऊपर गिट्टी बचाने के साथ आगे का काम किया जा रहा है। जांच में तथ्य स्पष्ट हो सकते हैं।
मिश्रित सामाग्री के अनुपात पर टिका है दारोमदार
वेट मिक्स मैकडम यानि डब्ल्यूएमएम तकनीक से बनने वाली सडक़ों को लेकर कहा जा रहा है कि यह टिकाऊ जरूर होती है लेकिन इसके लिए अनिवार्य शर्त यह है कि जिस पद्धति से निर्माण कराया जाना है, उसके अंतर्गत संबंधित सामाग्री का उपयोग निश्चित अनुपात में किया जाए। निर्माण के दौरान सबसे पहले पुराने निर्माण को हटाकर बोल्डर बिछाए जाते हैं। इसके अलावा पानी की तराई कराई जाने के साथ रोलर चलाने की व्यवस्था होती है। इसके बाद मिक्स प्लांट में जीरा गिट्टी, थोड़ी बड़ी गिट्टी और तारकोल का मिश्रण (ग्रेडेशन) को निश्चित तापमान में मिक्स किया जाता है और इसके बाद संबंधित क्षेत्र में इसकी लेयर बिछायी जाती है। अगली कड़ी में इसे कंप्रेशर दिया जाता है। जानकार बताते हैं कि पूरा काम मापदंड के अंतर्गत किया जाने पर ही तय होता है कि सडक़ कब तक टिकेगी।



























