
ऊधमपुर। उत्तरी सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल एमवी सुचिंद्र कुमार ने कहा कि बारामुला के गुलमर्ग में आतंकी हमले और हमलावरों को मिले सीमा पार से सहयोग को देखते हुए सेना अपनी रणनीतियों पर पुनर्विचार कर रही है। जम्मू-कश्मीर में सेना ने हिंसा के चक्र को तोड़ने और आतंकी इकोसिस्टम (पारिस्थितिकी तंत्र) को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया है।
शुक्रवार को उत्तरी कमान प्रमुख ने उत्तरी कमान मुख्यालय के ध्रुवा सभागार में पत्रकारों को आश्वस्त किया कि हाल ही में हुए हमलों के बाद स्थिति नियंत्रण में है। उन्होंने कहा कि पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की कमर तोड़ कर रख दी है। प्रदेश में शांति, समृद्धि व सुरक्षा स्थिति में सुधार सेना व अन्य एजेंसियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। गुलमर्ग में सेना के वाहन पर हुए हमले में सेना के तीन जवान बलिदान हुए और दो पोर्टर मारे गए। इससे दो दिन पहले गांदरबल में जेड-मोड़ सुरंग निर्माण स्थल पर एक डाक्टरों सहित छह लोगों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी। कश्मीर में आतंकी हमलों के बारे में पूछे सवाल पर उन्होंने कहा कि गुरुवार को श्रीनगर में एकीकृत मुख्यालय की बैठक में इन खतरों से निपटने के लिए रणनीति तैयार की गई। गुलमर्ग हमले पर विशेष आपरेशनल विवरण साझा करने से इनकार करते हुए आर्मी कमांडर ने कहा कि हमने नए खतरों, आतंकवादियों की कार्यप्रणाली व सीमा पार से उन्हें मिलने वाली मदद का आकलन किया है। नियंत्रण रेखा पर घुसपैठरोधी ग्रिड व भीतरी इलाकों में केंद्रित आतंकरोधी अभियानों ने जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास का वातावरण सुनिश्चित किया है। उन्होंने प्रशासन, अर्धसैनिक बल, पुलिस और खुफिया एजेंसियों के साथ सेना से समन्वय पर जोर दिया। उत्तरी कमान प्रमुख ने यह भी बताया कि पांच वर्षों में जम्मू-कश्मीर में 720 आतंकियों का सफाया किया है।




















