
चांपा। समीपस्थ ग्राम अफरीद निवासी आदिवासी विवाहित महिला से घर घुसकर मारपीट करने के आरोपी पर कानूनी कार्यवाही के मामले में सारागांव पुलिस द्वारा लापरवाही बरते जाने के बाद कांगेस नेता द्वारा आंदोलन की चेतावनी दिये जाने के पश्चात जागी पुलिस ने प्रकरण में आरोपी के विरूद्ध जुर्म दर्ज कर लिया है। इस मामले में सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र बम्हनीडीह में पदस्थ चिकित्सकों की भी बड़ी लापरवाही उजागर हुई है।
इस संबंध में मिली जानकारी के अनुसार शनिवार 25 मई को सुबह 9 बजे वार्ड नं. 11 आदिवासी पारा अफरीद निवासी आदिवासी विवाहिता मोतिम बाई मरावी पति नागेश्वर सिंह मरावी उम्म्र 27 वर्ष अपने घर में मां के साथ बैठी थी। इस दौरान ग्राम का ही युवक शांतिलाल भैना वहा आया और बैंक कर्मी को अपने घर का पता बताये जाने से नाराज होकर मोतिम बाई से गाली गलौच करते हुए मारपीट की। इस बीच उसकी मां उर्मिला मरकाम ने बीच बचाव किया तो आरोपी ने उसके साथ भी मारपीट व गाली गलौच की। बाद में वह मौके से भाग खड़ा हुआ। मोतिम बाई ने पूरी घटना की जानकारी अपने पति नागेश्वर सिंह मरावी को देते हुए दिन के 11 बजे सारागांव थाने पहुंचकर आरोपी शांतिलाल भैना के विरूद्ध शिकायत दर्ज कराई। सारागांव पुलिस द्वारा पीडि़ता को डॉक्टरी मुलाहिजा के लिए बम्हनीडीह के सीएचसी भेजा गया। यहां पदस्थ चिकित्सक ने इसे साधारण मारपीट का मामला बताते हुए महिला को घर भेज दिया। बाद में मोतिम बाई ने पूरी घटना की जानकारी राज्य परिवहन प्राधिकार के पूर्व सदस्य तथा कांग्रेस नेता मो. इब्राहिम मेमन को दी। उन्होंने पीडि़ता के साथ चांपा एसडीओपी यदुमणि सिदार से भेंट कर उन्हे पूरे मामले से अवगत कराकर न्याय सम्मत कार्यवाही की मांग की। एसडीओपी सिदार ने पीडि़ता के बाये हाथ की कलाई में सूजन देखकर उनका एक्स-रे कराया तो फ्रेक्चर निकला जबकि सीएचसी बम्हनीडीह में मौजूद
चिकित्सक ने इसे साधारण मामला बताकर पीडि़ता को घर भेज दिया था। पहले मामले की रिपोर्ट पर आरोपी के विरूद्ध न्यायोचित धाराएं लगाने में परहेज कर रही सारागांव पुलिस ने अंतत: कांग्रेस नेता मो. इब्राहिम मेमन के सामने आने के बाद भादवि की धारा 294, 323, 506, 452 एवं 325 के तहत जुर्म दर्ज किया है। उधर आरोपी द्वारा मामला वापस नहीं लिये जाने पर पीडि़ता को जान से मारने की धमकी दिये जाने की शिकायत मिली है। इस संबंध में इंका नेता मो. इब्राहिम मेमन ने कहा कि प्रदेश में आदिवासी मुख्यमंत्री का राज होने के बाद भी एक आदिवासी महिला को प्रताडि़त किये जाने के मामले में घंटो बाद आरोपी के विरूद्ध जुर्म कायम किया जाना यह साबित करता है कि प्रदेश में आदिवासियों की वास्तविक दशा क्या है।


























