
जांजगीर – चांपा। अंचल में सोमवार की रात से झड़ी लगी रही। इसके बाद मंगलवार को भी रूक रूक कर वर्षा हुई। इसके चलते खेतों में कट चुकी धान की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। वहीं खड़ी फसलें भी कई जगह गिर गई हैं। इस बेमौसम वर्षा से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें हैं। अगर एक दो दिन और वर्षा हुई तो किसानों को बड़ा नुकसान होगा ।जिला मुख्यालय सहित अंचल में सुबह से हो रही बेमौसम वर्षा से जीवन पूरी तरह प्रभावित रहा। सुबह से पूरे दिन रूक रूक वर्षा होती रही। वर्षा होने से मौसम में ठंडकता घुल गई। सोमवार से क्षेत्र में काली घटा छाने से क्षेत्र में हल्की बूंदी बादी शुरू हुई। जिला मुख्यालय सहित आसपास के गांवों में भी वर्षा हुई। पूरे दिन हो रही वर्षा के चलते किसानों के माथे में चिंता की लकीरें दिखने लगी है। दिसंबर माह के पहले सप्ताह में सभी खेतों में धान की फसलें तैयार है। वहीं किसान कटाई में भी जुट गए थे मगर वर्षा होने के चलते खेतों में कटे हुए धान भीग गए। जबकि खड़ी फसल भी गिर गई। इसके चलते किसान चिंतित हैं। उन्हें फसल बर्बाद होने की चिंता सताने लगी है। लगातार हो रही वर्षा के चलते किसानों को हजारों रूपये का नुकसान होने का अनुमान है। इस संबंध में मेहंदा के किसान संदीप तिवारी का कहना है कि किसानों ने बड़ी मेहनत से धान की खेती की थी । अभी जिले में बड़ी मात्रा में फसल की कटाई बची है। इस बार नहर विलंब से बंद होने के कारण खेतों तक हार्वेस्टर नहीं पहुंच सका। ऐसे में किसान हाथ से फसल कटवा रहे हैं इसलिए समय लग रहा है। वर्षा के चलते फसल भीग गई, इसके चलते हजारों रूपए नुकसान का अनुमान है। इस बार पर्याप्त वर्षा के चलते फसल ठीक हुई है। ऊपर से इस वर्षा ने किसानों की कमर तोड़ दी है। मिसदा, खपराडीह, तुलसी में फसल तैयार होने के बाद फसल को काट कर करपा के रूप में खेत में रखा गया है। वर्षा से कटी फसल भीग गई है। वहीं खड़ी फसल भी गिरने की खबर है। इससे किसानों को पूरी मेहनत के बाद जब उपज लेने का दिन आया तब वर्षा ने तबाही मचा दी। लगातार अगर दो तीन दिन वर्षा हो गई तो किसानों को ज्यादा नुकसान होगा। मौसम विभाग का कहना है कि ने मिचौंग तूफान के चलते यह वर्षा हुई है। मौसम विभाग ने इसका असर 7 दिसंबर तक रहने की बात कही है। बस्तर अंचल में इसका असर ज्यादा रहेगा । वर्षा के चलते खड़ी फसल में कीट प्रकोप बढऩे की भी आशंका है। किसान वैसे भी भूरा माहो, काला माहो और पेनिकल माइट से परेशान थे। अब ठीक कटाई के समय वर्षा ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। जिले में1 लाख 55 हजार हेक्टेयर में धान की फसल लगी है। लगभग 50 फीसदी फसल की कटाई हो गई है। इनमें से खेतों में रखी फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। जबकि खरही के रूप में खलिहान में रखी फसल को अपेक्षाकृत कम नुकसान हुआ है।



















