
जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर चांपा विधानसभा में अब तक हुए 15 बार के चुनाव में एक बार भी कोई महिला विधायक निर्वाचित नहीं हुई है। विधायक निर्वाचित होना तो दूर प्रमुख राजनीतिक दलों ने महिला उम्मीदवारों को मौका भी नहीं दिया है। संसद में इस बार महिला आरक्षण के लिए नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हो गया है। अविभाजित जांजगीर चांपा जिले के चंद्रपुर, सक्ती और पामगढ़ क्षेत्र में महिला विधायक निर्वाचित हो चुकी हैं। यहां कई बार महिला उम्मीदवारों को मौका भी मिला है मगर जांजगीर चांपा विधानसभा में अब तक एक भी बार महिला विधायक निर्वाचित नहीं हुई है। शुरू से ही यहां कांग्रेस , जनसंघ व भाजपा के बीच ही मुकाबला रहा है मगर इन बड़ी पार्टियों ने कभी महिलाओं को मौका ही नहीं दिया ।
1952 में विधानसभा चांपा के नाम से अस्तित्व में आया और कांग्रेस के रामकृष्ण राठौर पहली बार निर्वाचित विधायक बने। 1957 मेंवे दूसरी बार विधायक चुने गए । 1962 में यहां से जनसंघ के जीवन लाल साव विधायक निर्वाचित हुए। 1967 में फिर से क्षेत्र का नाम चांपा पड़ा और बिसाहूदास महंत यहां कांग्रेस से विधायक बने। इसके बाद वे 1972 और 1977 में भी विधायक रहे। 1980 और 1985 में चरणदास महंत यहां से कांग्रेस के विधायक रहे। 1990 में भाजपा के बलिहार सिंह विधायक बने। जबकि 1993 में चरणदास महंत फिर से यहां के विधायक हुए। 1998 में भाजपा से नारायण चंदेल यहां के विधायक चुने गए। 2003 में कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन विधायक रहे। 2008 में नारायण चंदेल फिर चुनाव जीते। जबकि 2013 में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा और मोतीलाल देवांगन विधायक बने। 2018 में नारायण चंदेल ने कांग्रेस के मोतीलाल को पराजित कर फिर विधायक बने। जांजगीर चांपा सीट पर भाजपा ने नारायण चंदेल को छठवीं बार टिकट दी है। वे 1998 से अविभाविजत मध्यप्रदेश के समय से यहां चुनाव लड़ रहे हैं। अब तक पांच बार हुए चुनाव में उन्होंने तीन बार जीत हासिल की है। वर्तमान में वे विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष हैं। वे पूर्व में विधानसभा उपाध्यक्ष और पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। हर बार उनके प्रतिद्वंदी यहां से कांग्रेस के मोतीलाल देवांगन रहे हैंं। देवांगन ने यहां से दो चुनाव जीता है। अभी कांग्रेस की सूची जारी नहीं हुई है। इसको लेकर लोगों में उत्सुकता है कि मैदान में चंदेल के विरोध में पार्टी किसको उतार रही है। अकलतरा विधानसभा से भाजपा ने सौरभ सिंह पर दूसरी बार भरोसा जताया है। वर्ष 2018 के चुनाव मेंभी वे विजयी हुए थे। उन्होंने बसपा उम्मीदवार पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की बहू और अमित जोगी की पत्नी ऋ चा जोगी को पराजित किया था। पिछले चुनाव में जब प्रदेश में कांग्रेस की लहर थी तब भी सौरभ सिंह ने यहां जीत हासिल की थी। यहां कांग्रेस के प्रत्याशी चुन्नीलाल साहू को तीसरा स्थान मिला था। पामगढ़ अजा आरक्षित सीट पर भाजपा नेइस बार नए चेहरे को मैदान में उतारा है। पार्टी के अजा मोर्चाकेजिलाध्यक्ष ग्राम भलवाही निवासी संतोष लहरे कोपार्टीनेटिकट दी है। वे प्रदेश मितानीन संघ के जिलाध्यक्ष भी हैं। जनपद पंचायत पामगढ़ में सदस्य एवंसेवा सहकारी समिति लगरा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। सामाजिक स्तर पर वे सतनामी सूर्यवंशी समाज के पामगढ़ ब्लाक के उपाध्यक्ष भी है। भाजपा ने जांजगीर चांपा जिले से दो पुराने दिग्गज को मैदान में उतारा है। वहीं पामगढ़ से नए चेहरे को मौका दिया है। पामगढ़ में बसपा ने वर्तमान विधायक इंदू बंजारे को फिर से टिकट दी है। जबकि अकलतरा में पार्टी में लंबे समय से सक्रिय बसपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डा. विनोद शर्मा को मैदान में उतारा है। वहीं जांजगीर चांपा विधानसभा से बसपा ने पूर्व जिलाध्यक्ष राधेश्याम सूर्यवंशी को टिकट दी है। क्षेत्रवासियों को अब कांग्रेस की सूची का बेसब्री से इंतजार है। चुनाव आयोग द्वारा अधिसूचना जारी किए जाने के बाद चुनावी रण तो तैयार है। बस योद्धाओं का इंतजार है। यहां 21 अक्टूबर से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। टिकट मिलने के बाद भाजपा व बसपा के उम्मीदवार चुनावी समर में कूद गए हैं। उन्होंने अपनी चुनावी तैयारी शुरू कर दी है। इसके साथ साथ वे क्षेत्र में लगातार जनसंपर्क कर रहे हैं। इधर कांग्रेस में अभी संभावित दावेदार सूची के इंतजार में हैं। अब तक पार्टी की एक भी सूची जारी नहीं हुई है। ऐसे में कांग्रेसी दावेदार अब भी अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जांजगीर चांपा विधानसभा के पहले चुनाव में 1952 में कांग्रेस के रामकृष्ण राठौर यहां से विधायक बने। इसके बाद 1957 में भी वे यहां से विधायक थे। पेशे से किसान होने के साथ उन्हें आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति व नाड़ी का भी अच्छा ज्ञान था। वे चुनाव प्रचार के दौरान न केवल अपना प्रचार करते थे बल्कि लोगों का उपचार भी करते थे। इस तरह वे लोगों का नब्ज पकड़ते विधानसभा तक पहुंचे थे।
















