इजराइल की तकनीक का उपयोग कर किसान हो रहे मालामाल

बिश्रामपुर। सूरजपुर जिला अंतर्गत सिलफिली व कल्याणपुर इलाके के किसान परंपरागत खेती को छोड़ अब आधुनिक तकनीक से सब्जी की खेती कर मालामाल होने रहे हैं। इन दोनों इलाके के दर्जन भर से अधिक किसान करीब सौ एकड़ भूमि में इजराइल की तकनीक से बैगन की खेती कर हर माह लगभग सौ टन बैगन का उत्पादन कर सिलफिली व अंबिकापुर मंडी में बेच रहे हैं। इससे किसानों को हर माह लगभग 20 से 25 लाख रुपये की आय हो रही है। आधुनिक खेती से किसानों को उपज लागत से कई गुना ज्यादा मुनाफा हो रहा है। यही वजह है कि इन इलाकों के किसान विज्ञानी विधि से तैयार किए पौधों से सब्जी का उत्पादन कर आर्थिक रूप से समृद्ध हो रहे है।
आधुनिक तकनीक के जरिए जिले की सबसे बड़ी सब्जी मंडी सिलफिली व कल्याणपुर इलाके में अन्य सब्जियों के साथ पिछले कुछ सालों से बैगन की खेती बड़े पैमाने पर की जा रही है। बैगन की खेती के लिए पौधे को जंगली बैगन के जड़ में तैयार किया जाता है। जिले के सिलफिली और आस पास के इलाके के किसानों द्वारा बैगन की उपज के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। यहां के किसान वैज्ञानिक तकनीक के तहत बैगन की खेती करके लाखों रूपए का आर्थिक लाभ अर्जित कर रहें हैं। यह बताना लाजिमी होगा कि विज्ञानी तकनीक से तैयार पौधे की जड़ और तना जंगली बैगन का होता है। इसके ऊपर हाईब्रीड बैगन के पौधे को कलम (ग्राफटिंग) के जरिए तैयार किया जाता है। उसके बाद इन पौधों को खेत में रोपित किया जाता है। क्षेत्र के यू ट्यूबर के साथ ही युवा कृषक दितेश राय की माने तो सब्जियों में उक्त तकनीक को सबसे पहले इजराइल देश ने अपनाया था। उसके बाद भारत ने इस आधुनिक तकनीक को साल 2016-17 में अपनाया। इस तकनीक के जरिए सब्जी उत्पादक करने वाले किसान छत्तीसगढ़ व पंजाब के जाने जाते हैं। वैसे तो छत्तीसगढ़ के किसानों ने इस तकनीक को साल 2016 में ही अपना लिया था। बावजूद इसके छत्तीसगढ़ में ग्राफटेड सब्जी के पौधे तैयार करने का सफल परीक्षण साल 2017 में हुआ था। इसका सफल परीक्षण राज्य की एक निजी बीज कंपनी ने किया था। इसी वजह से देश के कोने-कोने में इस तकनीक से तैयार बैगन, टमाटर और मिर्च के पौधे उपयोग में लगाए जा रहे हैं। इसको अपने खेतों में रोपित कर इलाके के किसान भी अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। बता दें कि देश में सब्जी के पौधे में ग्राफटिंग की शुरूआत इजराइल तकनीक से हुई है। उनका कहना है कि बैगन के ग्राफटेड पौधे इसलिए ज्यादा पैदावार देते हैं, क्योंकि जंगली पौधे काफी दिन तक जीवित रहते हैं। ऐसे में अगर ज्यादा दिन तक जिंदा रहने वाले पौधे के ऊपर हाईब्रीड पौधे को ग्राफ्ट कर दिया जाए, तो वे लंबी आयु पाकर ग्राफटेड हाईब्रीड पौधा ज्यादा पैदावार देकर किसान को खुशहाल और समृद्ध कर देता है। सिलफिली इलाके के किसानों ने बताया कि इजराइल तकनीक के पौधे जब से छत्तीसगढ़ में तैयार होने लगे हैं, उसी समय से वे लगातार बैगन की खेती कर रहे हैं। बैगन की पैदावार से वे साल भर में लाखों का मुनाफा अर्जित कर काफी खुशहाल हैं। वे कहते है कि यदि कोई किसान ऐसी खेती करना चाहता है, तो वह एक एकड़ में ग्राफटेड बैगन के तकरीबन दो से ढाई हजार पौधे रोपित कर सकता है। इस खेती में लगने वाले खाद, दवा, ड्रिप, मलचिन और देखरेख में करीब 70 हजार से एक लाख रूपए प्रति एकड में खर्च आता है। ग्राफटेड बैगन की पहली पैदावार 40 दिन में तैयार हो जाती है। 40 दिन में बैगन का उत्पादन शुरु हो जाता है। ग्राफटेड बैगन के पौधे की औसतन आयु एक साल है, लेकिन अच्छी देखरेख में ये पौधा डेढ़ से दो वर्ष तक भी उत्पादन दे सकता है। जानकारी के मुताबिक इस पौधे की ऊंचाई एक सामान्य इंसान से दो फिट ज्यादा मतलब करीब आठ फीट तक जाती है। सिलफिली इलाके के किसानों के अनुसार ग्राफटेड बैगन के एकल स्वस्थ पौधे से साल में औसतन 60 से 90 किलो तक का उत्पादन हो सकता है। ग्राफटेड पौधे से उत्पादित बैगन की बिक्री के लिये किसानों को कोई परेशानी नही होती है। जिसका प्रमुख कारण है सिलफिली का संभाग की सबसे बड़ी सब्जी मंडी है। यही वजह है कि यहां छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों के साथ ही मध्यप्रदेश, यूपी, झारखंड, बिहार और ओडि़शा के थोक व्यापारी मंडी में आकर ही बैगन की फसल को भी अपने-अपने प्रदेश में ले जाते हैं। इस कारण यहाँ के किसानों को अपने उत्पाद को बेचने में कठिनाई भी नहीं होती है और अच्छी खासी आमदनी पाकर किसान खुशहाल है।

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