एआई से संभव होगी किडनी रोगियों की बेहतर देखभाल, इसनेजकॉन- 202३ में देश-विदेश के प्रख्यात किडनी रोग विशेषज्ञ हो रहे शामिल

पटना, 0९ मार्च । इंडियन सोसाइटी आफ नेफ्रोलाजी ईस्ट जोन (आईएसएनईजेडकान-2023) के वार्षिक सम्मेलन का शुभारंभ शुक्रवार को हुआ। इसमें देश-विदेश के वक्ताओं ने किडनी रोगों की पहचान व उपचार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित तकनीकों की भूमिका, जलवायु परिवर्तन का किडनी रोग बढऩे पर दुष्प्रभाव समेत उपचार की अत्याधुनिक तकनीकों पर चर्चा की गई। इस कार्यक्रम का आयोजन बिहार नेफ्रोलाजी फोरम व होप किडनी फाउंडेशन के तत्वावधान में हो रहा है। इसका उद्घाटन मेदांता लखनऊ में किडनी प्रत्यारोपण विभाग के निदेशक व एसजीपीजीआई लखनऊ के पूर्व निदेशक डा. आरके शर्मा ने किया। इस दौरान इस बताया गया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से किडनी रोगियों का बेहतर उपचार संभव होगा। कार्यक्रम में पूर्वी भारत के लगभग 250 समेत देश-विदेश के प्रख्यात नेफ्रोलाजिस्ट भाग ले रहे हैं। आयोजन अध्यक्ष डा. प्रो. हेमंत कुमार, आयोजन सचिव सह आईजीआईएमएस के किडनी रोग विशेषज्ञ डा. अमरेश कृष्ण, वैज्ञानिक समिति के अध्यक्ष सह आईजीआईएमएस में किडनी रोग के विभागाध्यक्ष प्रो. डा. ओमकुमार व कोषाध्यक्ष डा. प्रीतपाल सिंह हैं। कार्यक्रम में आईजीआईएमएस पटना के कार्यवाहक निदेशक डा. वीएम दयाल, एम्स पटना के डीन रिसर्च डा. प्रेम कुमार, सी-डैक पटना के निदेशक आदित्य कुमार सिन्हा, कोलकाता के प्रो. डा. संजीव गुलाटी, ओडिसा के प्रो. डा. एसबी राउत, झारखंड के डा. एके वैद्य समेत अनेक प्रख्यात चिकित्सक उपस्थित थे। ब्रिटेन के डा. फिलिप कालरा क्रानिक किडनी डिजीज में आयरन थेरेपी के प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डायलिसिस की स्थिति में आयरन थेरेपी सीमित समय के लिए बेहतर प्रभाव दिखाती है। डा. हेमंत कुमार व डा. अमरेश कृष्णा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, वायु प्रदूषण, खाद्य सामग्री में बढ़ते रासायनिक खाद व कीटनाशकों के इस्तेमाल से किडनी रोगियों की संख्या बढ़ रही है।जीवनशैली व खानपान से बच्चे तक इसकी चपेट में आ रहे हैं। इस सम्मेलन का पटना में कराने का उद्देश्य नेफ्रोलाजी व चिकित्सा क्षेत्र में नई तकनीकों, शोध व अनुभव का आदान-प्रदान कर युवा डाक्टरों को लाभ पहुंचाना है।

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