
कोरबा। सार्वजनिक वितरण प्रणाली की दुकानों का संचालन करने वाला वर्ग इस बात को लेकर परेशान है कि व्यवस्था के तहत उसे कमीशन की राशि देने के मामले में खाद्य विभाग की ओर से आवश्यक कार्यवाही नहीं की जा रही है। इस समस्या को सबसे अधिक वे संचालक भुगत रहे हैं जिन्हें विकेंद्रीकरण के अंतर्गत पिछले वर्ष ही दुकानें आवंटित की गई। कमीशन के अभाव में कई प्रकार के खर्चों को वहन करने में दिक्कत हो रही है।
सरकार की नीति के तहत कोरबा जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अंतर्गत उपभोक्ताओं को सुविधा और राहत देने के क्रम में सैकड़ों की संख्या में नवीन पीडीएस दुकानें शुरू की गई। पहले से चल रही दुकानों के क्षेत्राधिकार में कटौती करने के साथ उनका समायोजन नवीन दुकानों में किया गया और वहां के उपभोक्ताओं की शिफ्टिंग इन दुकानों में की गई। योजना के तहत सार्वजनिक वितरण प्रणाली से उपभोक्ताओं को मिलने वाले राशन और अन्य सामानों का कोटा उपभोक्ता संख्या के हिसाब से तय होता है। इनकी सकल मात्रा के अनुपात में संचालकों को कमीशन दिया जाना प्रावधानित है। इसके जरिए दुकान के किराए, बिजली बिल से लेकर मौके पर रखे जाने वाले कर्मियों के मामले व अन्य स्तर पर होने वाली लाइजनिंग की व्यवस्था तय हो पाती है। खबर के मुताबिक लगभग एक वर्ष बीतने पर भी नवीन दुकानों के मामले में उनके संचालनकर्ताओं को कमीशन की राशि देने के लिए विभाग की ओर से गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है। अधिकारियों को अवगत कराने से लेकर पत्राचार किये जाने के बावजूद नतीजे सिफर हैं। कमीशन उपलब्ध नहीं कराने के चक्कर में विभिन्न प्रकार के खर्चों को चला पाने में समस्याएं पेश आ रही है।


















