
लखनऊ, २३ नवंबर। पूर्वांचल में नक्सलियों की बढ़ती सक्रियता के पुख्ता प्रमाण मिलने के बाद राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एनआईए) ने जांच शुरू कर दी है। एनआईए ने बीती 16 अगस्त को बलिया में हथियारों के साथ यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार किये गये पांच नक्सलियों पर दर्ज मुकदमे को टेकओवर किया है। राजधानी स्थित एनआईए के थाने में इस संबंध में नया केस दर्ज कर डीआईजी के नेतृत्व में जांच शुरू कर दी गयी है। बता दें कि इस नेटवर्क के तार वाराणसी, प्रयागराज, देवरिया, चंदौली, आजमगढ़ समेत कई शहरों से जुडऩे के बाद एनआईए ने 5 सितंबर को छापा मारकर अहम सुबूत भी जुटाए थे। यूपी एटीएस ने 16 अगस्त को बलिया में गोपनीय बैठक कर रहे पांच नक्सलियों तारा देवी, लल्लू राम, सत्य प्रकाश, राममूरत और विनोद साहनी को गिरफ्तार किया था। उनके पास से नाइन एमएम की पिस्टल, कारतूस, सात मोबाइल, लैपटॉप, प्रतिबंधित संगठन का नक्सली साहित्य, पम्पलेट और दस हजार रुपये बरामद हुए थे। एटीएस ने इनके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज किया था, जिसे अब एनआईए ने टेकओवर कर लिया है। एटीएस की जांच में सामने आया था कि सीपीआई (माओवादी) नक्सली संगठन की केंद्रीय कमेटी के प्रमोद मिश्रा उर्फ बुढऊ उर्फ बन बिहारी उर्फ डॉक्टर साहब ने पूर्वांचल में एडहॉक कमेटी बनाई थी। संगठन के सचिव बलिया निवासी संतोष वर्मा उर्फ मंतोष के जरिए लगाता पूर्वांचल के कई जिलों में महिलाओं और पुरुषों की भर्ती की जा रही थी। साथ ही, पूर्वांचल में किसी सरकार विरोधी आंदोलन को चुनकर उसको सशस्त्र आंदोलन में बदलने की साजिश रची जा रही थी। इसके लिए जंगल में हथियार चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा था।





























