
कुशीनगर, 01 सितम्बर । आवारा कुत्तों का आतंक शहर के प्राय: सभी मोहल्लों के लोग झेल रहे हैं। लोगों का कहना है कि इनकी वजह से बच्चों को अकेले स्कूल अथवा कहीं खेल में नहीं भेज सकते। वहीं महिलाओं का भी घर से बाहर निकलना कठिन हो गया। बुजुर्गों के टहलने में भी खतरा है। इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए नगर पालिका अथवा तहसील प्रशासन से कई बार कहा गया, लेकिन अधिकारी मौन साध लेते हैं। इस महीने यानी अगस्त की बात करें तो आवारा कुत्तों के काटने के 480 केस सीएचसी पहुंचे हैं, जहां उपचार के साथ उन्हें जरूरी इंजेक्शन तक लगवाए गए। नगर में आवारा एवं छुट्टा पशुओं को पकडऩे और उन्हें सुरक्षित स्थान पर छोडऩे की जिम्मेदारी नगर पालिका की होती है, लेकिन इस दिशा में कभी भी कोई कदम नहीं उठाया जाता। आवारा कुत्तों का आतंक शहर के सभी वार्डों में है, लेकिन शक्ति नगर, रामजानकी नगर और सुभाष नगर में ज्यादा है। इन वार्डों में मीट-मछली की दुकानें लगती हैं, जहां कुत्ते मंडराते रहते हैं। शक्तिनगर वार्ड में कुत्तों के काटने से अनमोल, डबली, श्वेता, अंकुर, मनीषा नामक बच्चे जख्मी होकर उपचार करा रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों को अकेले देखते ही कुत्तों का झुंड उन पर टूट पड़ता है। कई महिलाओं ने भी बताया कि बाजार करने अकेले निकलने पर कुत्ते चारों तरफ से घेर लेते हैं।
























