
बिलासपुर। द्वितीय अपर सत्र न्यायालय ने पूर्व में विचरण न्यायालय के फैसले को यथावत रखते हुए दोषियों को अर्थदंड भुगतान करने का आदेश दिया है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश ने मामले की सुनवाई के दौरान पाया कि 16 जुलाई 2014 को बड़ी कोनी में जयश्री शुक्ला अपने बेटे अमृताश शुक्ला के नाम पर गैस गोदाम के निर्माण करवा रहे थे। इस दौरान तत्काल सरपंच स्मृति श्रीवास, अपने पति त्रिलोक श्रीवास, आनंद श्रीवास व 80 से 100 की संख्या में ग्रामीण पहुंचे। तीन आरोपितों ने अनापत्ति प्रमाणपत्र न होने की बात कहते हुए गाली गलौज कर जयश्री शुक्ला व उनके बेटे अमृताश शुक्ला के साथ गाली गलौज कर मारपीट की वारदात को अंजाम दिया था। मामले में न्यायालय ने गवाहों के कथन के आधार पर अर्थ दंड से दंडित किया था। अपील करते हुए अभियुक्तों ने पंचायत अधिनियम का हवाला देकर अपील की थी। इसमें तर्क दिया गया था कि पत्नी स्मृति श्रीवास ग्राम पंचायत की सरपंच थीं। वह अपने पति त्रिलोकचंद्र के साथ ग्राम पंचायत के सरपंच होने के नाते, उन्होंने एनओसी न होने पर अवैध निर्माण को रोकने का प्रयास किया था। लेकिन विचारण न्यायालय ने इन तर्कों को ठुकरा दिया और दोषियों को सजा दी थी। अपील की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के साक्षियों ने पुष्टि की कि आरोपियों ने निर्माण को रोकने के प्रयास में प्रार्थियों के साथ मारपीट की थी। अपीलकर्ताओं ने पंचायत अधिनियम के तहत की गई कार्रवाई का तर्क दिया, जिसे न्यायालय ने ठुकरा दिया। अंततः अदालत ने पाया कि आरोपितों द्वारा प्रस्तुत तर्क पर्याप्त नहीं थे और विचारण न्यायालय का निर्णय सही था। इस प्रकार अपील खारिज कर दी गई और दोषियों को 1,500 रुपये का अर्थदंड अदा करने का आदेश बरकरार रखा है।




















