कांजी हाऊस की जगह पर सडक़ बनाने से हुई मवेशियों की मौत

सक्ती। नगर पालिका में वर्तमान में कांजी हाऊस नहीं है। ऐसे में आवारा व घरेलू पशु का नगर के सडक़ों बीचो बीच बैठने व खड़े रहने से उस सडक़ से आने वाले चार चक्का, बाइक और पैदल चलने वालों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ पर कभी भी 20 से 30 मवेशी सडक़ों के बीचो बीच खड़े व बैठे आसानी से दिख जा रहे हैं। इसके चलते राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। पहले एक कांजी हाउस वार्ड नं. 4 में हुआ करता था, जहां कांजी हाउस था, वहां इन दिनों विशाल दुकानें बन गई है।
यह दुकानें कैसे बनी और कांजी हाउस क्यों हटाया गया यह आम आदमियों के समक्ष से परे है। इसका खामियाजा अब नागरिक भुगत रहे है। जब कांजी हाउस हुआ करता था तब आवारा पशुओं को पकडक़र उसमें रखा जाता था। कांजी हाउस में पकड़े जाने के डर से पशुपालक घर में ही गाय को बांध कर रखते थे, क्योंकि कांजी हाउस में जाने के बाद नगर पालिका द्वारा विधिवत राशि लेकर गाय को दिया जाता था, लेकिन अब कांजी हाउस नहीं होने से घर में पालने वाले गाय को घर में ना रखने के बजाय बाहर छोड़ देते हैं।
कई बार नागरिकों ने नगर पालिका को पशुओं से होने वाले परेशानियों को अवगत कराया व कांजी हाउस बनाने की मांग की, परंतु इस कांजी हाउस की ओर ध्यान नहीं गया और आज तक कांजी हाउस नहीं बना। सडक़ पर मवेशियों का झुंड।

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