
कोरबा। चुनाव को लेकर भले ही शहरी क्षेत्र में टकराव से लेकर प्रतिद्वंदिता हावी रहती है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र इस मामले में बहुत आगे निकल चुके हैं। सक्ती जिले के मांजरकुद के लोगों ने ग्राम पंचायत के सभी वार्ड और सरपंच पद पर महिलाओं का निर्विरोध निर्वाचन कर एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत किया है। ग्रामीणों के इस सामूहिक फैसला से इस पंचायत में मतदान की स्थिति नहीं बन सकी और इसके चलते निर्वाचन आयोग की काफी धनराशि की बचत हुई है।।
डभरा ब्लॉक अंतर्गत बौराई नदी और महानदी के बीच में बसा टापूनुमा ग्राम मांजरकुद चर्चा का विषय बना हुआ है, क्योंकि इन्होंने जो महिला हक अधिकार के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। औसत साक्षरता के मामले में इस गांव में लोग कम शिक्षित है। रोजी मजदूरी करने वाले आबादी ग्राम में प्रथम बार पंचायत बनने के पश्चात सभी पंचों और सरपंच को महिला निर्विरोध निर्वाचित किया है।
इस निर्णय का मूर्त रूप देना आसान नहीं था, क्योंकि पंच,सरपंच बनने की इच्छा कई लोगों के मन में थी। इसके लिए ग्राम के बुजुर्ग लोगों ने आपस में बैठक की और महिलाओं को अधिकार दिलाने के बारे में सहमति बनाई और आखिरकार इस पर क्रियान्वयन हो गया। नवनिर्वाचित सरपंच कुसुम माली ने बताया कि ग्राम के लोगों ने उन्हें एक बड़ी जिम्मेदारी दी है, और उन्हें खुशी है कि उनके साथ देने वाली सभी पंच भी महिलाएं हैं वह ग्राम के विश्वास पर खरा उतरेंगे। पंच चुनकर आई कमला यादव का कहना है कि जिस तरह से वह अपने घर परिवार का भरण पोषण करती हैं,अपने परिवार को संभालती संवारती हैं इस तरह से हुए अब ग्राम पंचायत में भी अपने जिम्मेदारी निभाएंगे। कोटवार जीरालाल माली ने कहा कि यह प्रस्ताव शुरू में उनके द्वारा रखा गया कि क्यों ना इस बार ग्राम की कमान महिलाओं को सौंपा जाए और उनके इस निर्णय को मूर्त रूप देने के लिए ग्राम के सभी वर्ग और जाति के लोगों ने सहमति दी।
माजरकुड़ के पंचायत घटित होने के बाद पहले चुनाव में जिस प्रकार से लोगों ने सामूहिक एकता का परिचय देते हुए सरपंच और पंचों को निर्विरोध निर्वाचित किया है वह बिल्कुल अलग उदाहरण को प्रस्तुत करता है। उम्मीद करना होगा कि क्षेत्र के विकास के मामले में यह सभी निर्वाचित प्रतिनिधि अपनी बेहतर भूमिका निभाएंगे।

























