
जांजगीर- चांपा। अब मेडिकल स्टोर में पंजीकृत फार्मासिस्ट की जगह ग्राहकों को दवाईयां देने के लिए गैर पंजीकृत लोगों को रखना दुकान संचालकों को भारी पड़ेगा। वहीं ऐसे व्यक्ति को अब तीन माह तक की सजा या दो लाख रूपए जुर्माना या दोनों एक साथ होने का प्रविधान किया गया है।ज्यादातर मेडिकल स्टोर्स में डाक्टरों की पर्ची के आधार पर दवा देने के लिए 10 वीं, 12 वीं पास या फेल लोगों को रखा जाता है। मेडिकल स्टोर्स भी किसी दूसरे के नाम से चलता है और उसका संचालन कोई और करता है। इसके लिए अब फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया सख्त हुआ है।
अब गैर पंजीकृत व्यक्ति द्वारा दवा दुकान में दवाई वितरण करने पर उसे तीन माह तक की सजा या दो लाख रूपए का जुर्माना देना होगा या दोनों एक साथ देना पड़ सकता है। पहले यह सजा 6 माह तक थी या जुर्माना 1 हजार रूपए या दोनों था मगर इस नियम से गैर पंजीकृत लोग ज्यादा भयभीत नहीं थे। कानून व न्याय मंत्रालय भारत शासन द्वारा राजपत्र में प्रकाशित जन विश्वास (प्रविधान में संशोधन ) अधिनियम 2023 के क्रम संख्या 9 , पृष्ट संख्या 13, संशोधन क्रमांक डी के अनुसार फार्मेसी एक्ट 1948 की धारा 42 के दंड प्रविधान में संशोधन किया है। इस आशय की सूचना छत्तीसगढ़ स्टेट फार्मेसी काउंसिल रायपुर ने सभी मेडिकल स्टोर्स संचालक, फार्मेसी और अस्पतालों को दी है।






















