कैंप में बंधक लोगों को पुलिस ने कराया मुक्त

कोरबा। शहर में कई ऐसी मार्केटिंग कंपनियां संचालित है, जहां बेरोजगारों को अच्छी नौकरी व वेतन का सब्जबाग दिखाकर लूटा जा रहा। यदि कोई बेरोजगार नौकरी की लालच में एक बार फंस गया तो उसके लिए कंपनी से बाहर निकलना चुनौती से कम नहीं है। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जिसमें मीडियाकर्मियों के सहयोग से दो युवक थाना तक पहुंचने में कामयाब हो गए। उन्होंने पुलिस के सामने अपनी आपबीती सुनाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न सिर्फ दोनों युवक को कंपनी के चंगुल से बाहर निकाला, बल्कि उनकी जमा राशि वापस दिलाते हुए गृहग्राम के लिए रवाना किया।यह पूरा वाक्या सिविल लाइन रामपुर थाना क्षेत्र की है। दरअसल मीडियाकर्मियों को दो युवक ने वाट्सअप कालिंग कर सूचना दी कि वे पड़ोसी जिले के रहने वाले हैं। उन्हें खरमोरा क्षेत्र में संचालित जीपीआई कंपनी के कैंप से निकलने नहीं दिया जा रहा, जबकि वे काम छोडक़र जाना चाहते हैं। उन्होंने किसी तरह लुक छिपकर कॉल करने की बात कही। उन्होंने कंपनी के कैंप का लाइव लोकेशन भेज दिया, जिसकी मदद से मीडियाकर्मी खरमोरा-दादर मार्ग में एक स्थान पर पहुंचे। इसकी जानकारी होने पर नजरें बचाकर दोनों युवक बाहर आ गए। वे मीडियाकर्मियों की मदद से सिविल लाइन थाना पहुंचने में कामयाब हो गए। थाना प्रभारी सुमन पोया को पूछताछ के दौरान युवकों ने अपना नाम बिलासपुर जिले के कोटा इमलीपारा निवासी टारजन कुमार टांडे व रितिक पात्रेबताया। उन्होंने जानकारी दी कि गांव का रहने वाला रवि नामक उनके खास दोस्त ने कोरबा में जीपीआई नामक कंपनी संचालित होने की जानकारी दी।

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