
इस सीट पर सरोज का मुकाबला ज्योत्सना से
-राजनीतिक संवाददाता-
कोरबा। देश में नरेंद्र मोदी के नाम की लहर और भाजपा सरकार के द्वारा पिछले 10 वर्ष के दौरान किए गए कार्यों के बावजूद आखिर ऐसा क्या समीकरण है इसके कारण कोरबा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा को बेहद संघर्ष करना पड़ रहा है। लोकसभा चुनाव की घोषणा और भाजपा के द्वारा डॉक्टर सरोज पांडे को प्रत्याशी घोषित करने के बाद से लेकर लगातार यही दावे किए जाते रहे हैं कि कोरबा लोकसभा क्षेत्र उसके लिए बेहद आसान सीट है लेकिन अभी है गलतफहमी लगने लगी है। तमाम तरह के प्रयास करने के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह का आमसभा में यह कहना कि कोरबा लोकसभा क्षेत्र कठिन है, भाजपा के रणनीतिकारों की चिंता को साफ जाहिर करता है। इस तरह की बयान बाजी से मैदान पर काम कर रहे कार्यकर्ता हताशा में है और इससे कांग्रेस को एक तरह से संजीवनी मिल रही है।
छत्तीसगढ़ में सामान्य श्रेणी की लोकसभा सीट कोरबा से कांग्रेस ने दूसरी बार मौजूदा सांसद और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा चरणदास महंत की पत्नी ज्योत्सना महंत को प्रत्याशी बनाया है। उनके सामने भाजपा की राष्ट्रीय मंत्री डॉक्टर सरोज पांडे हैं। महापौर ,विधायक और राज्यसभा सदस्य के रूप में काम करने का अनुभव उनके पास है। लोकसभा चुनाव में पहली बार वे उतरी हैं और एक प्रकार से संगठन ने उन्हें टास्क देते हुए कठिन सीट पर उतार दिया है। हालांकि चुनाव की घोषणा के समय से भाजपा खेमा लगातार इस निर्णय की सराहना करता रहा और बार-बार दोहराता रहा की बहुत आसान मुकाबला है और देश में चल रही लहर से भी यहां काफी अनुकूलता हो सकती है। इन सब के बावजूद राष्ट्रीय नेत्री के पक्ष में अब तक कई बड़े नेता रोड शो के अतिरिक्त रैली और आमसभा कर चुके हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ प्रदेश के अनेक मंत्री के अतिरिक्त केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के लिए चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह की सभा भी जिले में हुई है।
बुधवार से पहले संसदीय क्षेत्र में भाजपा को लेकर जिस तरह क्या अनुमान लगाएं जा रहे थे, उन पर एक प्रकार से अल्पविराम लगाने की कोशिश गृह मंत्री के भाषण ने की है जिसमें उन्होंने कहा कि कोरबा सीट पर मुकाबला आसान नहीं है। यद्यपि अमित शाह ने यह कहने के दौरान किसी का नाम नहीं लिया लेकिन जनता को मालूम है कि कोरबा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के सामने मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में कांग्रेस सांसद ज्योत्सना महंत ही हैं। भले ही भाजपा की ओर से लगातार इस बात को प्रचारित किया जाता रहा है कि सांसद पिछले 5 साल के कार्यकाल के दौरान अपने क्षेत्र से लापता रही और उनके द्वारा कोई कामकाज इलाके में नहीं कराया गया। लेकिन कांग्रेस के मीडिया प्रभारी घनश्याम तिवारी के द्वारा 2 दिन पहले ही रिकॉर्ड के साथ स्पष्ट किया जा चुका है कि खुद लोकसभा में 5 साल के दौरान ज्योत्सना महंत की उपस्थिति 85 प्रतिशत से ज्यादा रही है। मतदान के लिए एक सप्ताह से कम का समय शेष होने के साथ अब दोनों तरफ से बयानबाजी तेज हो गई है और अपने-अपने काम और आगे का रोड मैप बताने की कोशिश भी की जा रही है। दोनों ही परियों की ओर से अलग-अलग गारंटी घोषित की गई है। पढऩे लिखने वाला वर्ग इसे अच्छे तरीके से समझ रहा है लेकिन एक बड़ा वर्ग पुराने जमाने से ढर्रे पर कायम है, यह भाजपा के लिए चिंता का कारण है।
कांग्रेस को मेडिकल कॉलेज और ईएसआईसी हॉस्पिटल का सहारा
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में खास तौर पर कोरबा को लेकर कोई बड़े मुद्दे दोनों राजनीतिक दल यानी कांग्रेस और भाजपा के पास नहीं है। कांग्रेस ने 48 पेज का घोषणा पत्र जारी किया है तो भाजपा ने इसकी तुलना में काम पेज का घोषणा पत्र सार्वजनिक किया है। नेताओं ने मंत्रणा करने और नफा नुकसान को ध्यान में रखते हुए कई चीजों को अपने घोषणा पत्र का हिस्सा बनाया है। कोरबा में कांग्रेस जनता का समर्थन प्राप्त करने के लिए मेडिकल कॉलेज और पिछले कार्यकाल में तैयार कराए गए ईएसआईसी हॉस्पिटल को बड़ी उपलब्धि बता रही है। ईएसआईसी का आधा अधूरा सेटअप और नाम मात्र की सुविधा से श्रमिक वर्ग को बहुत ज्यादा लाभ नहीं मिल पा रहा है यह भी सर्वविदित है। दूसरी तरफ भाजपा जिला खनिज न्यास में हुए घोटाले तथा दो प्रशासनिक अधिकारियों के जेल जाने को बड़ा मुद्दा बनाए हुए हैं। केंद्र सरकार की ओर से कराए गए कार्यों को वह सीधे तौर पर भूना रही है। जबकि आगे किए जाने वाले कार्यों को भी लोगों के सामने रखने का काम कर रही है। इधर कुनबा बढ़ा, उधर हुआ बिखराव
लोकसभा क्षेत्र कोरबा में नया सांसद चयन के लिए जब निर्वाचन की प्रक्रिया 7 मई को होने जा रही है तब भारत निर्वाचन आयोग के द्वारा 8 विधानसभा क्षेत्र में 16 लाख से अधिक मतदाताओं को मताधिकार के लिए पात्रता दी गई है। इनमें से संक्षिप्त पुनरीक्षण के बाद मतदाताओं की कुछ संख्या में बढ़ोतरी हुई है। विधानसभा चुनाव के बाद से भाजपा के लिए सभी तरफ माहौल अनुकूल हुआ। कोरबा भी इसमें पीछे नहीं रहा, जहां पर बड़ी संख्या में कांग्रेस, जनता जोगी कांग्रेस और दूसरे दलों से टूटकर आए पदाधिकारी व कार्यकर्ता भाजपा में शामिल हो गए। इससे भाजपा का कुनबा बड़ा है वही कांग्रेस के लिए परेशानियां तो है ही। पिछले चुनाव की तरह इस बार भी कांग्रेस कोरबा लोकसभा क्षेत्र में अपने परंपरागत वोटो के भरोसे हैं। इन सबसे अलग चुनाव में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के द्वारा भरतपुर सोनहत क्षेत्र के श्याम सिंह को मैदान में उतरने से मुख्य दोनों राजनीतिक दलों की चिंता कुछ हद तक बढ़ी है। विश्लेषण बताते हैं कि गोंडवाना को मिलने वाले वोट दूसरे राजनीतिक दल के समीकरण पर अलग-अलग तरीके से असर डालने का काम करते हैं।





















