
कई घंटे विलंब से चल रही एक्सप्रेस
कोरबा। एक तरफ 43 डिग्री तापमान वाली गर्मी और उपर से एक्सप्रेस ट्रेनों का अनियमित परिचालन। ऐसे में यात्री भारी हलाकान हो रहे हैं। परिस्थितियों को समझने के लिए रेलवे प्रशासन तैयार नहीं है। कोरबा से चलने वाली छत्तीसगढ़ और शिवनाथ एक्सप्रेस की अरसे से बिगड़ी हुई चाल ने यात्रियों को परेशान कर रखा है। इन्हें कैसे ठीक किया जाए इस बारे में कोई संतोषजनक जवाब रेलवे के पास नहीं है।
अमृत भारत स्टेशन के तौर पर कोरबा को विकसित करने के लिए दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे को भारत सरकार ने सैकड़ों करोड़ की राशि उपलब्ध कराई है। फुट ओवरब्रिज निर्माण के साथ-साथ स्टेशन के विकास समेत कई प्रकार के काम चल रहे हैं। जल्द ही इन्हें पूरा करने की योजना है। इन सबसे अलग कोरबा के साथ रेलवे से जुड़ी परेशानियां यात्रियों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। गिनती की चार एक्सप्रेस ट्रेन कोरबा को उपलब्ध कराई गई है और ये भी सही समय पर नहीं चलकर यात्रियों को परेशान करने पर तुली है। आए दिन गाडिय़ों को बंद करने और बार-बार उन्हें लेट करने के मामले अब आम हो गए हैं। पिछले लंबे समय से इतवारी नागपुर से कोरबा को आने वाली शिवनाथ एक्सप्रेस तीन घंटे विलंब से चल रही है। जिस गाड़ी को कोरबा सुबह 9 बजे पहुंच जाना चाहिए वह दोपहर 1 बजे से लेकर 2 बजे तक आ रही है। गर्मी के दौर में इस प्रकार का विलंब अलग-अलग क्षेत्र से जुड़े यात्रियों के लिए कुल मिलाकर सिरदर्द है। यही हाल कोरबा से अमृतसर के बीच चलने वाली छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस का हो गया है। रेलवे ने इसका अधिसूचित समय 11.20 बजे का तय किया है। सोमवार को रेलवे ने घोषित किया कि अब यह लिंक एक्सप्रेस के टाइम पर कोरबा स्टेशन से रवाना होगी। यानि अपनी तैयारी से स्टेशन पहुंचने वाले लोगों को अगले सफर पर जाने के लिए 4 घंटे से भी ज्यादा प्रतीक्षा करनी होगी। ऐसे में लोगों के पूरे कार्यक्रम गड़बड़ा रहे हैं। कोरबा स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं मुहैया कराने से गर्मी में गाडिय़ों की प्रतीक्षा करना भी किसी चुनौती से कम नहीं है।
वाटर कूलर नहीं कर रहे काम
स्टेशन में रेलवे की ओर से इकलौता वाटर कूलर काफी समय से काम नहीं कर रहा है। ऐसे में गर्मी के मौसम में ठंडा पानी यात्रियों को मिल पाना मुश्किल हो गया है। जानकारी सामने आने के बाद एक सामाजिक संस्था ने यहां पर व्यवस्था करने पर ध्यान दिया है। कोरबा रेलवे स्टेशन पर केवल प्लेटफार्म नंबर-1 में ही कुछ सुविधाएं दी गई है जबकि 2 और 3 नंबर प्लेटफार्म में अधिकतम कोयला गाडिय़ों की आवाजाही होने से कुल मिलाकर जटिलता है।
लगातार हो रही अनदेखी
प्रतिवर्ष रेलवे को दो हजार करोड़ का राजस्व कोरबा से प्राप्त हो रहा है। इसमें यात्री टिकट से लेकर कोल परिवहन से मिलने वाली राशि शामिल है। भारी भरकम कमाई होने पर भी कोरबा को पर्याप्त महत्व देने में रेलवे की रूचि नहीं है। इसलिए काफी समय से रेलवे पर कोरबा की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं।




























