
कोलकता, २५ अगस्त ।
महिला डॉक्टर से दरिंदगी की घटना की जांच कर रही सीबीआई ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. संदीप घोष पर शिकंजा कस दिया है। शनिवार को पॉलीग्राफ टेस्ट से सच्चाई जानने के लिए केंद्रीय जांच एजेंसी ने डॉ. घोष से 25 सवाल किए और आर्थिक भ्रष्टाचार मामले में उनके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कर ली।डॉ. घोष के अलावा पांच अन्य लोगों का भी पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ। घटना के मुख्य आरोपित संजय राय का पॉलीग्राफ टेस्ट शनिवार को नहीं हो सका। सूत्रों के अनुसार डॉ. घोष को रविवार को भी सीबीआई ने बुलाया है और कहा जा रहा है कि उनका फिर से पॉलीग्राफ टेस्ट हो सकता है। पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए दिल्ली स्थित केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (सीएफएसएल) से विशेषज्ञों का एक दल कोलकाता आया है।डॉ. घोष के अलावा जिन अन्य का पॉलीग्राफ टेस्ट हुआ है, उसमें संजय राय का दोस्त सौरव भट्टाचार्य और घटना की रात ड्यूटी कर रहे चार जूनियर डॉक्टर शामिल हैं। इन जूनियर डॉक्टरों के साथ महिला डॉक्टर ने घटना वाली रात भोजन किया था, जबकि कोलकाता पुलिस के सिविल वालंटियर सौरव को घटना के एक दिन पहले आठ अगस्त को अस्पताल में संजय राय के साथ देखा गया था। उस दिन सौरव अस्पताल में भर्ती अपने रिश्तेदार को देखने गया था। रात को उसने संजय राय के साथ शराब पी थी।मालूम हो कि पॉलीग्राफ टेस्ट के समय व्यक्ति द्वारा प्रश्नों के उत्तर देते वक्त एक मशीन की मदद से उसकी शारीरिक प्रतिक्रियाओं को मापकर पता लगाने की कोशिश की जाती है कि वह सच बोल रहा है या झूठ।इसके अलावा सीबीआई ने अस्पताल में वित्तीय भ्रष्टाचार के मामले की जांच भी तेज कर दी है। बंगाल सरकार द्वारा 20 अगस्त को गठित एसआईटी ने मामले से जुड़े सारे दस्तावेज सीबीआई को सौंप दिए। हाईकोर्ट ने शुक्रवार को जांच सीबीआई को सौंपी थी। भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर हाईकोर्ट में दो याचिकाएं डॉ. घोष के पूर्व सहयोगी अख्तर अली व अधिवक्ता सुष्मिता साहा दत्ता ने दाखिल की थीं। न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज ने सीबीआई को तीन सप्ताह में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी। सीबीआई के रिमांड नोट व फोरेंसिक रिपोर्ट में सामूहिक दुष्कर्म का उल्लेख नहींसीबीआई की ओर से सियालदह कोर्ट में मुख्य आरोपित संजय राय की न्यायिक हिरासत के लिए जो रिमांड नोट जमा किया गया था, उसमें सामूहिक दुष्कर्म नहीं, दुष्कर्म व हत्या की बात कही गई है। सूत्रों ने बताया कि रिमांड नोट में नृशंस घटना में एक से अधिक लोगों की संलिप्तता की बात भी नहीं लिखी है। संजय राय के अलावा किसी और आरोपित का उल्लेख नहीं है।घटना की फोरेंसिक रिपोर्ट में भी सामूहिक दुष्कर्म का उल्लेख नहीं है। उसमें लिखा है कि मृतका के गुप्तांग से जो चिपचिपा पदार्थ मिला, वह संजय के डीएनए से मेल खाता है। संजय ने शुक्रवार को अदालत में पेशी के दौरान रोते हुए खुद को निर्दोष बताया था। कोलकाता पुलिस ने जांच के लिए संजय की बाइक भी सीबीआई को सौंप दी है।





























