
नईदिल्ली, १० जनवरी । सविता कंसवाल, भारत की ऐसी पहली महिला, जिन्होंने माउंट एवरेज और माउंट मकालू पर चढ़कर इतिहास रचा। महज 16 दिनों में उन्होंने 28 मई को माउंट मकालू चोटी पर सफलता हासिल की थी। हालांकि, अपने ही जिले की एक चोटी फतेह करते हुए उनकी जान चली गई थी। वह 40 लोगों के दल के साथ गई थी। उन्हें 9 जनवरी 2024 को मरणोपरांत तेनजिं नोर्गे राष्ट्रीय पुरस्कार 2022 से नवाजा गया।यह अवॉर्ड लेने समारोह में उनके पिता राधेश्याम कंसवाल पहुंचे, जिन्हें राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पुरस्कार सौंपा। इस अवॉर्ड को लेते वक्त उनके परिवार के सदस्य भी वहां मौजूद थे। उनके पिता और माता की आंखों में आंसू भर गए थे और समारोह में बैठा हर शख्स काफी इमोशनल हो गया था। इस कड़ी में खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने भी अपने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो शेयर की, जिसे काफी ज्यादा पसंद किया जा रहा है। दरअसल, खेल मंत्री अनुराग ठाकुर ने वीडियो शेयर की है, जिसमें सविता के पिता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अवॉर्ड लेते हुए नजर आ रहे हैं। इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा कि दिन का सबसे भावुक पल। यह बेहद इमोशनल और गर्व से भरपूर रहा, जब श्री राधे श्याम कंसवाल जी ने अपनी दिवंगत बेटी सविता कंसवाल की तरफ से लैंड एडवेंचर में तेनजिंग नोर्गे राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार 2022 लिया।सविता 16 दिनों के अंदर माउंट एवरेट्स और माउंट मकालू पर चढऩे वाली पहली भारतीय पहली बनीं। पर्वतारोहण में एक दशक लंबे करियर के साथ, उन्होंने कर्तव्य की पंक्ति में अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और सहनशक्ति का प्रदर्शन किया और वीरता प्रदर्शित की। कंसवाल उत्तराकाशी जिले के भटवाड़ी ब्लॉक स्थित ग्राम लौंथरू निवासी युवा पर्वतारोही थी, जिनका बचपना आर्थिक तंगी में गुजरा। सविता के पिता राधेश्याम और मां कमलेश्वरी ने खेती बाड़ी से ही परिवार का पालन पोषण किया। सविता की पढ़ाई सरकारी स्कूल से हुई थी।उन्हें बचपन से ही एडवेंचर स्पोर्ट का शौक रहा। स्कूल समय से ही महज 11 साल की उम्र में सविता ने परिवार के खिलाफ जाकर एनसीसी ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी थी। साल 2013 में उन्होंने नेहरू पर्वतारोहण संस्थान उत्तरकाशी से पर्वतारोहण का बेसिस कोर्स किया।मात्र 6000 रुपये की सैलरी में उन्होंने खर्चा चलाकर पैसे बचाने शुरू किए और साल 2016 में एडवांस माउंटेनियरिंग का कोर्स पूरा किया। इसके बाद एडवांस और सर्च एंड रेस्क्यू कोर्स के सा पर्वतारोहण प्रशिक्षक का कोर्स भी किया। साल 2018 से हृढ्ढरू में बतौर ट्रेनर वह काम कर रही थीं। उन्होंने मेहनत, लगन और पेशन के साथ 12 मई 2022 को माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई की और वह माउंट ल्होत्से चोटी पर तिरंगा लहराने वाली वह देश की दूसरी महिला पर्वतारोही बनी।





















