
मुंबई। महाराष्ट्र में भारी बहुमत से भाजपानीत महायुति सरकार बनने के बाद वैसे तो राजनीतिक स्थिरता पर कोई शक नहीं किया जा सकता। लेकिन विभिन्न दलों में आंतरिक असंतोष कुछ नए गुल कभी भी खिला सकता है। इन्हीं में एक है राकांपा नेता छगन भुजबल के मन में पल रहा असंतोष। उपमुख्यमंत्री अजीत पवार की पार्टी राकांपा के वरिष्ठतम सदस्यों में से एक छगन भुजबल को इस बार मंत्रिमंडल में स्थान नहीं मिल सका है। वह इससे नाराज चल रहे हैं। अजीत पवार के प्रति वह अपनी नाराजगी खुलकर व्यक्त भी कर चुके हैं। तभी से यह आशंका भी जताई जा रही है कि वह राकांपा छोड़कर सत्तारूढ़ गठबंधन के ही दूसरे दल भाजपा में जा सकते हैं। इन्हीं अफवाहों के बीच शुक्रवार को छगन भुजबल पहले पुणे के निकट चाकण में राकांपा (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार के साथ मंच साझा करते दिखाई दिए। इसके कुछ देर बाद वह मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के साथ उन्हीं के वाहन में यात्रा करते दिखाई दिए और सातारा जिले में आयोजित एक कार्यक्रम के मंच पर उनके साथ भी उपस्थित रहे। इस कार्यक्रम में दोनों नेता ने एक-दूसरे की तारीफ में कसीदे पढ़ते भी दिखाई दिए। दरअसल शरद पवार के साथ भुजबल का मंच साझा करना एक संयोग कहा जा सकता है। क्योंकि चाकण में आज महान समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की जयंती के अवसर पर सावित्रीबाई फुले एवं महात्मा फुले की प्रतिमाओं के अनावरण कार्यक्रम में दोनों नेताओं को एक साथ बुलाया गया था। वहां इन दोनों नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। वास्तव में छगन भुजबल भी उसी माली समाज से आते हैं, जिससे महात्मा फुले एवं सावित्रीबाई फुले आते थे। भुजबल महात्मा फुले समता परिषद नामक एक सामाजिक संगठन भी चलाते हैं, जिसका बड़ा जनाधार महाराष्ट्र के अलावा कई और राज्यों में भी है। इस संगठन के जरिए वह अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) को संगठित करने का काम करते रहते हैं। ओबीसी की राजनीति में भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे गोपीनाथ मुंडे भी भुजबल को अपना नेता मानते थे।




















