
बलौदा। धान लेकर सोसायटी पहुचे माजदा को कलेक्टर द्वारा गठित टीम ने पकडक़र थाना परिसर में खड़ा किया है पर इसमे कार्रवाई किस तरह हुई इसको लेकर अधिकारी गोलमोल जवाब दे रहे हैं।
बलौदा ब्लाक में कलेक्टर द्वारा गठित टीम ने दो सोसाइटी पर विशेष नजर रखा है। शुक्रवार को खिसोरा सोसायटी से अधिकारियों ने 47 बोरी धान सहित माजदा वाहन को जब्त किया और पुलिस थाना में खड़ा किया। मगर वाहन को क्यों पकड़ा, क्या गड़बड़ी थी इसका जवाब अधिकारियों के पास भी नहीं है। पूछने पर सभी अधिकारी अलग अलग जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। । शुक्रवार को खिसोरा सोसायटी के गेट के पास माजदा क्रमांक सीजी 11 एके 9475 को मंडी निरीक्षक एपी गोस्वामी, तहसीलदार करुणा आहेर, उप पंजीयक एवं डीएमओ गजेंद्र राठौर ने रोककर जांच की। जांच में क्या कमी मिली जिसके कारण अधिकारियों ने 47 बोरी धान लोड माजदा वाहन को बलौदा थाना में लाकर पुलिस की निगरानी में रखा 1 इस मामले में जब तहसीलदार करुणा आहेर से पूछा गया तो उन्होंने जिला टीम के द्वारा कार्रवाई की बात कही। वहीं डीएमओ गजेंद्र राठौर से इस मामले की जानकारी लेने पर मंडी निरीक्षक एपी गोस्वामी से जानकारी लेने की बात कही गई। इस मामले में गोस्वामी से पूछने पर उन्होंने वाहन के चालक पर शराब के नशे में होने की बात कही और बताया कि वह अभद्र व्यवहार कर रहा था।
माजदा वाहन की सोसाइटी के पास जांच की गई तो किसान का टोकन था। ऐसे में किसान के धान को सोसाइटी में खाली क्यो नही कराया गया, अधिकारी के अनुसार ड्राइवर शराब के नशे में था • तो पुलिस में ड्राइवर के विरुद्ध शिकायत क्यो नही की गई।
बलौदा ब्लाक के धान खरीदी केंद्र खिसोरा हमेशा किसी न किसी मामले में सुर्खियो में रहता है। इस वर्ष भी यहां किसानों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, किसानों से हर कार्य के लिए पैसे मांगने का आरोप लगा है, वही व्यापारियों को हर तरह की सुविचाए देने का आरोप है इसलिए थाना लाया गया। इस मामले की गोस्वामी द्वारा थाना में चालक के विरुद्ध कोई शिकायत नही की गई हैं और न ही थाना में कोई चालक था। थाने में किसी वाहन चालक द्वारा अभद्रता किए जाने की कोई शिकायत दर्ज नही है। केवल 47 बोरी धान लोड़ माजदा थाने में खड़ी थी। गोस्वामी ने बताया कि धान कृष्ण कुमार साहू का है टोकन कटा है, तो 47 बोरी धान से भरी मजादा वाहन को थाने में क्यों लाया गया इसका जवाब का मंडी निरीक्षक नही दे सके। चाहन को थाना में लाने के कुछ घण्टो बाद अधिकारियों के बोल बदल गए ।
अधिकारी का जवाब संदेहास्पद
धान के साथ थाने लाकर अधिकारी क्या सिद्ध करना चाहते हैं यह समझ से परे है। अगर किसान का धान नहीं था तो जब्ती की कार्रवाई हो और टोकन था तो किसान को परेशान करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए ।



















