
नई दिल्ली। मेडिकल में दाखिले से जुड़ी परीक्षा नीट-यूजी में बढ़े रजिस्ट्रेशन और स्कोर पर उठ रहे सवालों के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना है कि यह बढ़ोत्तरी परीक्षा से जुड़े सुधारों के चलते आया है। उन्होंने कहा कि परीक्षा का आयोजन 13 भारतीय भाषाओं में कराने, मेडिकल की पढ़ाई हिंदी माध्यम में भी कराने, परीक्षा के पाठ्यक्रम को छोटा रखने व राज्यों के शिक्षा बोर्ड के साथ प्रश्नों को लेकर तालमेल स्थापित करना इसकी बड़ी वजह है। प्रधान ने जल्द ही इसके आंकड़े भी जारी की बात कही। केंद्रीय मंत्री प्रधान ने कहा कि इस परीक्षा के लिए देश भर के 24 लाख बच्चों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जिसमें से 23 लाख बच्चों ने परीक्षा दी। यह परीक्षा 4750 केंद्रों पर आयोजित की थी। इनमें 14 परीक्षा केंद्र देश के बाहर भी थे। इनमें से छह परीक्षा केंद्रों पर गलत पेपर बंटने से छात्रों को कम समय मिलने का मामला था, जिन्हें इस नुकसान की भरपाई के लिए कमेटी के सुझाव पर ग्रेस मार्क्स दिए गए थे, लेकिन उस पर उठे सवालों के बाद ग्रेस मार्क्स देने का फैसला अब वापस ले लिया गया है। प्रधान ने कहा कि ऐसे छात्रों को परीक्षा में फिर से बैठने या बगैर ग्रेस मार्क्स के अपने मूल अंक को स्वीकार करने का विकल्प दिया गया है। ऐसे में यह विवाद अब खत्म हो गया है। दूसरा विषय एक-दो परीक्षा केंद्रों पर पेपर लीक होने का है। जिसका विषय सुप्रीम कोर्ट के सामने है। कोर्ट जो भी निर्देश देगा, वह उसका पालन करेंगे। प्रधान ने एक सवाल के जवाब में कहा कि वह परीक्षा को फुलप्रूफ बनाने की दिशा में काम कर रहे है। इस परीक्षा में अब तक जिस तरह की गड़बड़ी की बात सामने आयी है, वह इसकी जांच करा रहे है। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्हें कतई छोड़ेंगे नहीं। इसके साथ ही उन्होंने इस मामले में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की जवाबदेही तय करने की भी बात कहीं और कहा कि चाहे गलत पेपर खुलने का मामला हो या दूसरी कोई भी गड़बडी, जो भी जिम्मेदार होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।