गुणवत्ता की अनदेखी से नहरो की हालत जर्जर

जांजगीर-चांपा। अकलतरा सब डिवीजन अंतर्गत जर्वे से लेकर सराईपाली नहर के बीच नहर कई जगहों पर इस तरह जर्जर हो चुकी है कि कब नहर ढह जाए कहा नहीं जा सकता। पैनल पूरी तरह से तबाह हो चुके हैं मगर इसके बावजूद भी मरम्मत के लिए कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कुछ साल पहले ही इस नहर में मरम्मत का कार्य चला रहा है जिसमें करोड़ों रुपए फूंक दिए गए, इसके बावजूद एक साल भी मरम्मत नहीं टिका। आज स्थिति यह है कि नहर की स्थिति इतनी दुर्गति हो गई है कि नहर में जगह-जगह से सीमेंट बह चुका है और केवल गड्ढे नजर आ रहे हैं। बारिश के दिनो में बलौदा ब्लाक के नहर टूटने की घटना भी हुई थी। इसके बाद भी विभाग इस दिशा में ध्यान नहीं दे रहा। इसे विडंबना ही कहें कि नहर की ऐसी दुर्गति और कहीं नहीं, बल्कि जिला मुख्यालय में जहां सिंचाई विभाग का दफ्तर मौजूद है वहां से चंद दूरी पर आईबी रेस्ट हाउस से लेकर पेंड्री नहर पार के बीच की है। जहां कई स्थानों पर नहर की वाल पूरी तरह से टूट गई है। कई जगहों पर पैनल धंस गई है और कई जगहों पर तो सीमेंट की जगह केवल मिट्टी ही नजर आ रहा है। खरीफ फसल के बाद नहर में पानी की धार बंद हो चुकी है। ऐसे में नहरों की मरम्मत अभी कराई जा सकती है लेकिन इस दिशा में ध्यान नहीं है। सिंचाई विभाग के दफ्तर के सामने से होकर गुजरी बड़ी नहर की हालत ही बदहाल है। इसके बावजूद नहर मरम्मत की सुध नहीं ली जा रही। सालों मरम्मत में करोड़ों खर्च के बाद भी नहरों की स्थिति नहीं बदल रही। हर साल नहर मरम्मत के नाम पर सिंचाई विभाई के द्वारा करोड़ों रुपए खर्च किया जाता है लेकिन इसके बाद भी नहर की दुर्गति किसी से छिपी नहीं है। बताया जा रहा है जांजगीर सब डिवीजन के अंतर्गत करीब पांच साल पहले बड़ी और छोटी नहर मेंटनेंस के लिए 17 करोड़ रुपए रुपए स्वीकृत किए गए हैं लेकिन जिस तरह से मेंटनेंस का काम हुआ है वह एक साल भी टिक नहीं पाया। इधर फिर से रबी फसल के लिए नहर की धार छूटेगी। ऐसे में कुल मिलाकर मेंटनेंस के नाम पर हर साल करोड़ों का वारा-न्यारा किया जा रहा है। इसका खामियाजा जिले के किसानों को भुगतना पड़ रहा है। खरीफ फसल तैयार हो जाने पर विभाग द्वारा नहर की धार बंद कर दी गई है। नहर की धार बंद होने के बाद अब केवल गंदगी और कूड़ा-करकट नजर आ रहा है लेकिन विडंबना ही कहें कि नहर की मेंटनेंस का काम तो दूर की बात है नहर की साफ-सफाई का कोई अता-पता नहीं है। जबकि पानी छोडऩे से पहले हर साल नहर की सफाई करने के निर्देश रहते हैं मगर अब तक इस दिशा में कोई काम नहीं किया जा रहा है। चारों ओर कचरा फैला हुआ है। इसके चलते परिणाम यह होता है कि जब पानी छोड़ा जाता है तो पानी टेल एरिया तक नहीं पहुंचता। बाद में किसान परेशान होते रहते हैं। वर्तमान में नहर की वॉल पर कार्ड का कब्जा है। जिसे साफ करने ध्यान नहीं दिया जा रहा। वहीं कूड़ा-कचरे का भी अंधार है। यहां तक सेफ्टी वॉल जो टूटकर गिरी है, वैसे ही पड़ी हुई है।

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