ग्रामीणों की याचिका खारिज, सकरेली फाटक हमेशा के लिए होगा बंद

सकरेली। सक्ती जिले का सकरेली फाटक आज 31 अगस्त को रात 10 बजे से हमेशा के लिए बंद कर दिया जाएगा। ग्रामीणों ने फाटक बंद होने से रोकने के लिए हाई कोर्ट में याचिका लगाई थी मगर वह खारिज हो गया। अब ग्रामीण आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि रेलवे के निर्णय से गांव की 60 प्रतिशत जनता प्रभावित होगी। गांव वालों की अंडर ब्रिज बनाने की मांग धरी की धरी रह गई। ग्रामीणों की मांग पर न तो जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया और न ही रेलवे प्रशासन ने। अब स्थिति यह है कि 31 अगस्त से सकरेली फाटक बंद हो जाएगा और ग्रामीणों की परेशानी बढ़ जाएगी। सकरेली फाटक को बंद करने की अंतिम तारीख आने के बाद से ग्रामीणों में अब फिर से आक्रोश पनप रहा है और वे अपनी परेशानी को लेकर चिंतित हैं। सकरेली बा. में स्थित फाटक ओवहरब्रिज बनने के बाद बंद किया जा रहा है। ग्रामीणों की मांग है कि यहां अंडर ब्रिज बनाया जाए अन्यथा गांव दो हिस्से में बट जाएगा।
जनप्रतिनिधि बोले अंडरब्रिज से दूर होगी समस्या
सकरेली बा. की सरपंच अनिता गेंदराम खाण्डे का कहना है कि सकरेली में जो रेलवे ओवर ब्रिज बना है वह नेशनल हाइवे को ध्यान में रखते हुए बड़े वाहनों के लिए बनाया गया है न कि गांव की जरूरतों को देख के बनाया गया है। ओवरब्रिज बनाने से चार पहिया एवं बड़े वाहन बिना किसी रुकावट के चल रहे हैं लेकिन गांव के लोगों को तो फाटक से ही आना जाना है। क्योंकि जो ओवरब्रिज बना है वह गांव के बाहर से जाता है। फाटक के बंद होने से ग्रामीणों को लंबी दूरी तय कर आवागमन करना होगा। भाजपा नेता प्रकाश साहू ने कहा कि ग्रामवासियों की कृषि भूमि लगभग 2 हजार एकड़ रेलवे फाटक के उस पार होने के कारण आने जाने में परेशानी होगी। ग्रामवासी किसी की मृत्यु होने पर मुक्तिधाम जाने में परेशान होंगे।
स्टेशन भांठा, सकरेली भांठा, केसला नवागांव के ग्रामवासियों को सोसायटी से चावल लेने आने के लिए परेशानी होगी। प्रकाश साहू ने सांसद से आग्रह किया कि वे रेलमंत्री को अवगत कराएं और किसानों के हित को ध्यान में रखते हुए अंडर ब्रिज शीघ्र स्वीकृत कराएं। पूर्व जनपद सदस्य व कांग्रेस नेता बंशीधर खाण्डे ने कहा कि जिला प्रशासन ने गांव वालों के हित को दरकिनार करते हुए हाईकोर्ट को अधूरी जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी जिसमें प्रशासन ने पक्ष को गलत ढंग से रखा । उन्होंने फाटक बंद करने का निर्णय वापस लेने की मांग की है।
ग्रामीणों ने कहा वैकल्पिक व्यवस्था के बाद बंद हो फाटक
गांव के धनेश्वर पाण्डेय ने कहा कि ग्राम सकरेली का जो फाटक है वह ब्रिटिश जमाने से चलते आ रहा है। इस लाइन के उपर से जो ओवरब्रिज बना है वह फाटक के उस तरफ से शुरू होकर ग्राम को पूरा छोड़ते हुए सीधे केसला के पास उतरता है। जिससे ग्रामीणों को आवागमन के लिए काफी दिक्कत होगी। इसलिए गांव वाले अंडर ब्रिज की मांग कर रहे हैं।
ग्रामीण देवचरण तम्बोली ने कहा कि ग्राम सकरेली के फाटक को बंद करने के बाद आवागमन के लिए काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। फाटक के बंद होने के बाद सभी बसों को ओवरब्रिज से होकर जाना पड़ेगा और गांव में बसों का आना बंद हो जाएगा। जिसके चलते ग्रामीणों को ग्राम केसला जा कर बस पकडऩा पड़ेगा। वरिष्ठ नागरिक संघ के उपाध्यक्ष गंगा राम चौहान ने कहा कि मुक्तिधाम उस पार है। हाई स्कूल के बहुत बच्चे फाटक के उस पार से आते हैं। मवेशी भी उस पार चरने जाते हैं। फाटक को बंद करने से गांव का विकास रूक जाएगा। रेलवे प्रशासन से मांग है कि जब तक कोई व्यवस्था नहीं होती है तब तक फाटक को बंद करने का निर्णय न लिया जाए।

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