
श्रीनगर। अफगानिस्तान से मई 2021 को अमेरिकी सेना की वापसी से जम्मू-कश्मीर में आतंकी हिंसा बढ़ने की जताई गई आशंका सही साबित हो रही है। अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की ओर से छोड़े गए हथियार ही नहीं बल्कि तालिबान के साथ मिलकर नाटो सेनाओं के खिलाफ लड़ने वाले जिहादी भी जम्मू-कश्मीर में दाखिल हो रहे हैं। बीते तीन वर्ष के दौरान विभिन्न आतंकी हमलों व मुठभेड़ में लगभग 55 सैन्यकर्मियों का बलिदान और इस दौरान मारे गए आतंकियों के पास से मिले हथियार व अन्य साजो सामान भी इसकी पुष्टि करते हैं। नए आतंकियों के अधिकांश हथियार अमेरिकी और नाटो सेनाओं द्वारा इस्तेमाल किए गए हैं। ताजा आंकड़ों के अनुसार, जम्मू कश्मीर में लगभग 180 आतंकी सक्रिय हैं और इनमें से अधिकांश विदेशी हैं। इन आतंकियों के पास अमेरिकी हथियारों की मौजूदगी और अमेरिकी सेना के खिलाफ लड़ाई (गुरिल्ला युद्ध) का उनका अनुभव सुरक्षाबलों के लिए एक नई चुनौती बन चुका है। एसएसपी रैंक के एक अधिकारी ने कहा कि वर्ष 2021 और उसके बाद से जो भी आतंकियों के वीडियो सामने आए हैं, उनमें अधिकांश में उन्हें एम249 आटोमैटिक राइफलें, 509 टैक्टिकल गन्स, एम1911 पिस्तौल और एम4 कार्बाइन राइफलों के साथ देखा जा सकता है। आतंकियों के पास स्टेयर एयूजी राइफलें भी हैं।
जम्मू-कश्मीर में स्टिकी बम और लिक्विड आइइडी भी बरामद हुई हैं। स्टिकी बम और लिक्विड आइइडी भी तालिबान ने अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना के खिलाफ इस्तेमाल की हैं। आतंकियों के पास से अल्ट्रा रेडिया सेट, इरीडियम सेटलाइट फोन, वाइ-फाई युक्त थर्मल इमेजिरी उपकरण भी मिले हैं।





























