
जांजगीर। ज्ञानोदय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जांजगीर में संस्था के प्राचार्य डॉ. सुरेश यादव के मार्गदर्शन में शिक्षिकाओं द्वारा छात्राओं को गुड टच और बैड टच के बारे में बताया गया।अगर आपको कोई टच करता है आपको अच्छा लगता है या स्नेह की अनुभूति होती है तो यह गुड़ कहलाता है।इसको आप अपनी माँ, पिता,बड़ी बहन,दादी के टच से फील कर सकते हैं।बैड टच क्या होता है? जब कोई व्यक्ति इस तरह से छूता है कि आप इससे असहज महसूस करते हैं या फिर उस व्यक्ति का छूना आपको बुरा लगता है ।इस दौरान शिक्षिकाओं ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि बच्चे अबोध होते हैं। उन्हें अपने आसपास सब अच्छा ही लगता है ऐसे में वह कई बार अपने साथ होने वाले गलत कार्य को भी नहीं समझ पाते और माता-पिता भी यही समझते हैं कि उनके साथ सब अच्छा ही हो रहा है ।यही वजह है कि बच्चों के साथ मानसिक एवं शारीरिक उत्पीडऩ के मामले बढऩे लगे हैं। ऐसी ही घटनाओं को ध्यान में रखकर गुड टच और बैड टच के बीच का फर्क खुलकर समझाया गया। बच्चों को बताया गया कि कैसे कोई व्यक्ति देखभाल करने के उद्देश्य से गलत नीयत से शरीर को स्पर्श कर जैसे सिर पर थपथपाना शारीरिक या भावनात्मक रूप से चोट पहुँचा सकता है। शिक्षिकाओं ने जानकारी दी कि ऐसी शिक्षा के यह फायदे हैं कि इसे सीखने के बाद बच्चे कभी भी अपने साथ होने वाले अनुचित स्पर्श का अनुभव कर सकेंगे और वे अपनी परेशानी जाहिर करने से घबराएंगे नहीं। कार्यक्रम में श्रीमती शैलेंद्री बरेठ,श्रीमती मीना यादव, श्रीमती किरण यादव ,कुमारी प्रिया कोसरे ,कुमारी सुमन यादव, श्रीमती उमा साहू आदि शिक्षिकाएं उपस्थित थी।




























