तृणमूल के लिए उल्टा पड़ रहा बाहरी का सवाल, ममता की पार्टी से बड़े मुद्दे को हाइजैक करने की जुगत में भाजपा

कोलकाता, २७ मार्च । 2021 के बंगाल विधानसभा चुनाव में बाहरी को बड़ा मुद्दा बनाने वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए 2024 के लोकसभा (लोस) चुनाव में यही मुद्दा बड़ा सवाल बन गया है। पिछले विस चुनाव में बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी से लेकर उनकी पार्टी के तमाम नेताओं ने चुनाव प्रचार करने दूसरे राज्यों से आए विरोधी दलों, विशेषकर भाजपा के नेता-मंत्रियों को बाहरी बताया था। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के लिए भी इसी तरह की बातें तृणमूल की ओर से की गई थीं।ममता ने उन सभी को बसंत की कोयल करार देते हुए कहा था कि वे सिर्फ चुनाव के मौसम में बंगाल आते हैं। अब जब तृणमूल ने गत 10 मार्च को कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में विशाल रैली कर लोस चुनाव के लिए अपने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा कर दी है, तो उस पर बाहरी लोगों को टिकट देने को लेकर निशाना साधा जाने लगा है। ममता ने बहरमपुर से पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, बद्र्धमान-दुर्गापुर से एक और पूर्व क्रिकेटर कीर्ति आजाद और आसनसोल से एक बार फिर अभिनेता शत्रुघ्न सिन्हा को टिकट दिया है। यूसुफ गुजरात तो शत्रुघ्न सिन्हा व कीर्ति आजाद बिहार से हैं। तृणमूल की सूची जारी होते ही बंगाल भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने तंज कसते हुए कहा था कि ममता बनर्जी की पार्टी बाहर से लोगों को बंगाल ला रही है। यूसुफ पठान गुजरात से हैं। पीएम मोदी भी गुजरात से हैं, लेकिन तृणमूल के लिए वे बाहरी हैं। वहीं भाजपा के आइटी सेल के प्रमुख व बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने कहा था कि तृणमूल की सूची ऐसे प्रत्याशियों से भरी है, जिन्हें ममता बनर्जी बहिरागत (बाहरी) कहती हैं। बंगाल कांग्रेस अध्यक्ष अधीर रंजन चौधरी भी पीछे नहीं रहे थे। बहरमपुर में अपने प्रतिद्वंद्वी यूसुफ पठान को लेकर उन्होंने कहा कि तृणमूल अगर वाकई यूसुफ पठान का सम्मान करना चाहती थी तो उन्हें राज्यसभा भेजना चाहिए था अथवा आईएनडीआईए गठबंधन से बातचीत करके उन्हें उनके राज्य गुजरात में कोई सीट दिलवानी चाहिए थी। वहीं वाममोर्चा का कहना है कि दूसरे राज्यों से ताल्लुक रखने वाले लोगों को बंगाल में प्रत्याशी बनाकर तृणमूल भाजपा को बाहरी बताने के अपने ही आख्यान (नैरेटिव) को झुठला रही है।तृणमूल के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर राय ने कहा कि वीके कृष्ण मेनन और बीआर आंबेडकर यहां से चुनाव में खड़े हुए थे। बंगाल ने उन्हें कभी बाहरी नहीं माना। बाहरी वे लोग हैं, जो बंगाल का अपमान करते हैं, जो बंगाल पर कब्जा करने की बात करते हैं और जो बंगाल को उसके वाजिब हक से वंचित करते हैं। उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू की सरकार में रक्षा मंत्री रहे वीके कृष्णा मेनन ने 1969 में बांग्ला कांग्रेस के टिकट से बंगाल की मिदनापुर सीट से लोस चुनाव जीता था जबकि अंबेडकर बंगाल से संविधान सभा के लिए चुने गए थेबंगाल की राजनीति पर पैनी नजर रखने वालों का कहना है कि पिछले विस चुनाव में बाहरी को मुद्दा बनाकर ममता के हाथ बड़ी सफलता लगी थी इसलिए भाजपा इस मुद्दे की अहमियत समझ रही है और इसे तृणमूल के खिलाफ हथियार बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। मालूम हो कि तृणमूल ने अपनी सूची जारी करने से पहले भाजपा के आसनसोल सीट पर भोजपुरी अभिनेता व गायक पवन सिंह को प्रत्याशी बनाते ही सवाल दागा था कि क्या उसे बंगाल में प्रत्याशी नहीं मिल रहे। हालांकि नाम की घोषणा के 24 घंटे बीतते न बीतते पवन सिंह ने आसनसोल से चुनाव लडऩे से इन्कार कर दिया था। अब भाजपा इस मुद्दे को ‘हाइजैक’ करने की कोशिश में है, हालांकि उसे इस बात का विशेष ध्यान ध्यान देना होगा कि बंगाल में उसका एक भी प्रत्याशी दूसरे राज्यों का न हो। अब देखना यह है कि भाजपा तृणमूल की तरह इस मुद्दे को भुना पाने में सफल हो पाती है या नहीं।

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