
नईदिल्ली, २८ जुलाई ।
दिल्ली के थाने और चौकी में सीबीआई के छापे में कई पुलिसकर्मियों के रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार होने की अफवाह से शनिवार को दिनभर दिल्ली पुलिस में हडक़ंप मचा रहा। पुलिसकर्मियों के वॉट्सऐप ग्रुपों में छापों से संबंधित संदेश वायरल होने से वे एक-दूसरे को फोन कर सच्चाई का पता लगाने में जुटे रहे। हाल के महीने में थानों में लगातार सीबीआई के छापे पडऩे व पुलिसकर्मियों को रिश्वत लेते पकड़े जाने के बाद इस तरह की अफवाह फैली, जिससे दिल्ली पुलिस दहशत में आ गई। जब सभी सूचनाएं अफवाह निकलीं तब दिल्ली पुलिस ने राहत की सांस ली। शनिवार सुबह अफवाह फैली कि सीबीआई की टीम जब किसी शिकायत पर रेड करने प्रेम नगर थाने पहुंची तब वहां तैनात ड्यूटी ऑफिसर महिला हवलदार सुमित्रा ने उनसे पूछा कि उन्हें किनसे मिलना है।
सीबीआई कर्मी द्वारा तेज आवाज में हवलदार से बात करने पर कहासुनी हो गई। इस पर गुस्से में महिला हवलदार ने एक सीबीआई कर्मी को तमाचा जड़ दिया। सीबीआई कर्मी के साथ बदसलूकी करने पर मामला बिगड़ गया। बाद में सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों ने हस्तक्षेप कर मामले को शांत कराया। लेकिन इससे सीबीआई की रेड सफल नहीं हो पाई। अधिकतर पुलिसकर्मी थाना छोड़ बाहर निकल गए। पूरे रोहिणी जिले में रात तक इसकी चर्चा होती रही।इसके बाद दूसरी अफवाह सीबीआई द्वारा शालीमार बाग थाने में एक सब इंस्पेक्टर को ढ़ाई लाख रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने की अफवाह फैली। तीसरी अफवाह नई दिल्ली जिला के स्पेशल स्टाफ के इंचार्ज संजय गुप्ता की टीम के सदस्य एक एएसआई को सीबीआई द्वारा रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किए जाने की अफवाह फैली। चौथी अफवाह सराय काले खां चौकी में एक पुलिसकर्मी को रिश्वत की रकम के साथ गिरफ्तार किए जाने की अफवाह फैली। जिससे दिन भर दिल्ली पुलिस में इसको लेकर चर्चा होती रही।पुलिस के आंकड़ों को देखें तो इस साल अब तक करीब 30 से 40 पुलिसकर्मियों को सीबीआई रिश्वत लेते गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें अधिकतर पुलिसकर्मी अब तक तिहाड़ जेल में ही बंद है। उन्हें जमानत नहीं मिल पाई है।
ऐसा पहली बार हुआ है जब हर माह पांच से छह थानों में सीबीआई के छापे पड़ रहे हैं। इससे दिल्ली पुलिस की छवि पर बुरा असर पड़ रहा है।दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों की मानें तो पिछले ढाई-तीन साल में दिल्ली पुलिस में भ्रष्टाचार तेजी से बढऩा शुरू हुआ है। इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा है कि पहले अनुभवि इंस्पेक्टरों को थानों में थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी जाती थीं। जिनका थानों में तैनात कर्मियों पर अंकुश रहता था। इंस्पेक्टरों को तीन साल तक ही थानाध्यक्ष बनाने संबंधी स्टेंडिंग आर्डर लाने के बाद से स्थिति बिगडऩी शुरू हो गई है।अधिकतर थानों में नए इंस्पेक्टरों को थानाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी गई है, जिससे वे पुलिसकर्मियों से सही तरीके से कामकाज नहीं ले पाते हैं। कुछ साल पहले पीसीआर यूनिट को बंद कर थाना पुलिस के साथ मर्ज करने पर भी काफी बुरा असर पडऩे लगा था, जिससे पीसीआर को दोबारा स्वतंत्र यूनिट बनाना पड़ा। ठीक उसी तरह तीन साल ही इंस्पेक्टर थानाध्यक्ष पद पर रहेंगे, इसे भी गलत फैसला माना जा रहा है। दो साल पहले दिल्ली पुलिस की तत्कालीन विशेष आयुक्त सुंदरी नंदा द्वारा ऐसा नियम बनाने से विभाग पर बुरा असर पड़ रहा है।सूत्रों की मानें तो शनिवार को मुख्यालय में आला अधिकारियों की बैठक बुलाई गई। जिसमें विशेष आयुक्त से लेकर डीसीपी रैंक के सभी अधिकारी उपस्थित थे। माना जा रहा है हाल ही में लगातार थानों में हुई सीबीआई के छापे को लेेकर सख्त आपत्ति जाहिर की गई और इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिले के डीसीपी को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए गए। जिसके बाद कुछ जिले के डीसीपी ने भी सभी थानाध्यक्षों के साथ बैठक कर उन्हें सख्त हिदायत दी।




























