
वाराणसी, २६ नवंबर ]। राज्यपाल व कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कहा कि सबसे अधिक जातिवाद पढ़े-लिखे लोगों में व्याप्त है। विश्वविद्यालय में जब भी किसी नए कुलपति की नियुक्त होती है तो उनकी जाति के लोग उनके इर्द-गिर्द मंडराने लगते हैं। आगे बोलीं कि हमें जातिवाद से बाहर निकलना होगा, तभी हम अपने देश को आगे ले जा पाएंगे। कहा कि दो वर्षों में जहां भी नियुक्ति हुई है उसमें कोई गड़बड़ी नहीं हुई, जो होनहार होगा अब उसी को जगह मिलेगी। शनिवार को संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के 41वें दीक्षा समारोह की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी संस्कृति वसुधैव कुटुंबकम की रही है। जी-20 सम्मेलन भी इसी थीम पर हुआ। हम विकास के साथ अपनी विरासत संरक्षित कर रहे हैं। वहीं 25 साल में विकसित राष्ट्र बनने के लिए हमें बहुत कार्य करना होगा।कहा कि संस्कृत में पीएचडी उपाधि हासिल करने वाली महिलाएं व छात्राओं से ही भारतीय ज्ञान परंपरा विश्व में फैलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि हम सभी को संकल्पित होना पड़ेगा कि माता-पिता को बुढ़ापे में वृद्धाश्रम में नहीं छोड़ेंगे। इस विश्वविद्यालय ने भी 232 वर्षों में भारत को अनेक विद्वान दिए हैं लेकिन पिछले 15-20 वर्षों में विवि की छवि धूमिल हुई है। राज्यपाल पटेल ने कहा कि विद्यार्थियों को उपाधि के लिए अब विश्वविद्यालयों की दौड़ नहीं लगानी होगी। सूबे के सभी 32 विवि की डिग्रियां डिजि-लाकर में अपलोड करने की प्रक्रिया जारी है। राज्यपाल ने बटन दबाकर आनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र व डिजि-लाकर का शुभारंभ किया।इस दौरान कुलाधिपति ने 25 मेधावियों को 45 मेडल प्रदान किए। अंत में राज्यपाल ने प्रधानमंत्री के पांच प्रण आत्मनिर्भर भारत, गुलामी की मानसिकता से निकलना, देश की विरासत को सुदृढ़ करना, भारत की एकता बनाए रखने तथा देश को आगे बढ़ाने में अपनी उपयोगिता को दोहराया।
































