
जांजगीर-चांपा। जिले के किसानों को इन दिनों खून पसीने की कमाई धान की अंतर की राशि पाने के लिए पसीना बहाना पड़ रहा है। धान खरीदी के शुरूआती दिनों से ही बैंक प्रबंधन की बदइंतजामी और कैश की किल्लत ने किसानों को हलाकान कर दिया है। स्थिति यह है कि गांव देहात की शाखाओं की बात तो दूर जिला मुख्यालय जांजगीर में ही किसान बैंक में जमा अपने ही खाते की राशि निकलवाने मशक्कत कर रहे है। खास बात यह है कि इतनी बदइंतजामी और परेशानी के बाद भी विभाग के जिम्मेदार अफसरों के साथ प्रशासन भी अंजान बना हुआ है।
गौरतलब है कि विष्णुदेव साय सरकार की घोषणा अनुसार धान खरीदी सम्पन्न होने के सप्ताह भर बाद भी फरवरी महीने में किसानों के खाते में अंतर की राशि जमा कर दी गई है। इसके जानकारी मिलने के बाद से किसान अपने खाते में जमा हुई अंतर की राशि निकलवाने के लिए जिला सहकारी बैंक पहुंच रहे है, लेकिन बैंक प्रबंधन की लापरवाही और बदइंतजामी ने किसानों को परेशान कर रखा है।
अफसरों को नजर नहीं आ रही जिला सहकारी बैंक जांजगीर की अव्यवस्था स्थिति यह है कि धान बेचने के दिनों से ही बैंकों में चल रही कैश की किल्लत अभी तक खत्म नहीं हुई है। ऐसे में किसानों को जहां धान
बिक्री की पूरी राशि नहीं मिल सकी है तो वहीं अंतर की राशि पाने वालों की भीड़ बैंक में टूट पड़ी है और उन्हें फिर से पसीना बहाना पड़ रहा है।
लाख रुपए निकलवाने में लग जाते है महीने भर
जिला सहकारी बैंक में बीते ढाई महीनों से यहां जो कैश की किल्लत का रोना रोया जा रहा है वह अभी तक जारी है। जिला मुख्यालय जांजगीर के जिला सहकारी बैंक में सैकड़ों किसानों की भीड़ सुबह से शाम तक लगी होती है, अब उन्हें 25-30 हजार से अधिक राशि एक बार में नहीं मिलती। इतना ही नहीं भीड़ को देखते हुए ग्रामवार किसानों को सप्ताह में एक दिन भुगतान करने का फरमान भी चला आ रहा है।
ऐसे में किसानों को यदि अपने खाते से 1 लाख निकलवाना हैं तो एक महीने का समय लग जाता है। दूसरी ओर यदि थोडी बहुत पहुंच लगाई जाए अथवा जिला सहकारी विभाग के लोगों से संपर्क किया जाए तो दान दक्षिणा करने में बड़ी राशि भी मिल जाती है। बताया जाता है कि कुछ लोग इसी तरह से राशि निकलवाने में लगे होते है।



















