
गाजियाबाद, २१ अक्टूबर ।
कभी रालोद का गढ़ माने जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2014 के बाद परिवर्तन की ऐसी बयार बही कि गढ़ ध्वस्त हो गया और रालोद को अब अपना अस्तित्व बचाना भी मुश्किल हो रहा है। खोई हुई जमीन की तलाश में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से हाथ मिलाया लेकिन उसका भी नतीजा खास नहीं रहा।अब लोकसभा चुनाव करीब आ रहे हैं तो एक बार फिर रालोद ने अपने कैडर वोटर को वापस पाने के लिए हुंकार भरी है। सत्ताधारी पार्टी भी इससे वाकिफ है, इसलिए वह रालोद के सामने नमो भारत ट्रेन का आगाज कर विकास का एजेंडा लेकर सियासी मैदान में उतरी है। यह ट्रेन जैसे-जैसे पश्चिमी उप्र में रफ्तार भरेगी, वैसे-वैसे रालोद की चुनौती बढ़ेगी।मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट पर पिछले तीन बार से भाजपा के राजेंद्र अग्रवाल ने लोकसभा चुनाव में जीत हासिल की है तो दूसरी तरफ गाजियाबाद में भी लोकसभा की सीट पर लंबे समय से भाजपा का कब्जा है, दो बार से यहां पर वीके सिंह जीत हासिल कर रहे हैं, इस बार वह हैट्रिक लगाने के लिए मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। बागपत-मोदीनगर सीट पर भी भाजपा का ही कब्जा है, यहां पर सत्यपाल सिंह दो बार से चुनाव जीत रहे हैं। इन तीनों सीटों पर नमो भारत ट्रेन का असर आगामी लोकसभा चुनाव में दिखाई देगा ही लेकिन मुजफ्फरनगर से लेकर सहारनपुर भी इससे अछूता रहीं रहेगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने तो पहले ही इस ट्रेन का विस्तार मुजफ्फरनगर तक करने के लिए केंद्र सरकार को पत्र लिखा है।
बुलडोजर भी डालेगा चुनाव पर असर पश्चिमी उत्तर प्रदेश एक समय अपराध के लिए भी देश में चर्चित था। यहां पर लूट, छिनैती, अपहरण और रंगदारी के लिए मर्डर की वारदातों के कारण व्यापारी दहशत में थे तो नए उद्योगों को लगाने से कारोबारी अपने पैर पीछे खींच रहे थे। इसके बाद मुजफ्फरनगर में हुए दंगे ने तो प्रदेश में कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए थे। 2017 में प्रदेश में सत्ता बदली तो कानून व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपराधियों पर शिकंजा कसा गया, कई नामी बदमाश मुठभेड़ में ढेर हुए और उनकी अपराध से अर्जित संपत्ति पर बुलडोजर चला। पुलिस का खौफ अपराधियों में बढ़ा तो आपराधिक आंकड़ों में उल्लेखनीय गिरावट भी हुई, जिस कारण अब पश्चिमी यूपी में विकास को बढ़ावा मिला, जिससे लोग प्रभावित हैं।


















