नईदिल्ली, १५ अक्टूबर ।
राजधानी दिल्ली में एक बार फिर उपराज्यपाल ने हस्तक्षेप कर दिल्ली की बड़ी समस्या का निवारण कर दिया है। एलजी ने कूड़े के पहाड़ों को खत्म करने से लेकर कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट और मध्य जोन के 25 वार्ड का घर-घर से कूड़ा उठाने की निविदा को भी जारी किया जा सकेगा।यह शक्तियां स्थायी समिति के पास होती थीं, लेकिन एमसीडी एक्ट के अनुच्छेद 202 का उपयोग करते हुए उपराज्यपाल ने इन परियोजनाओं को मंजूर करने की शक्ति निगमायुक्त को दे दी है। हालांकि एलजी ने आदेश दिया है कि इन परियोजनाओं को मंजूर करने के बाद में निविदाओं का विस्तृत विवरण स्थायी समिति के समक्ष मंजूरी के लिए रखना होगा।
उल्लेखनीय है कि निगमायुक्त के पास पांच करोड़ तक की परियोजनाओं को मंजूर करने की शक्ति है। इससे अधिक तक की परियोजनाओं को मंजूर केवल और केवल स्थायी समिति की मंजूरी से किया जा सकता है। निगम में आप और भाजपा के बीच चल रही राजनीतिक खींचतान और कानूनबाजी के चलते स्थायी समिति का गठन करीब 20 माह से नहीं हो पाया है। इसका सीधा असर एमसीडी से जुड़ी परियोजनओं पर पड़ रहा है। राजनिवास के अनुसार, स्थायी समिति के गठन न होने की वजह से छह लंबित परियोजनाओं को मंजूर करने की शक्ति निगमायुक्त को दे दी है।
इन छह परियोनजाओं की लाग 2400 करोड़ रुपये हैं। एलजी के आदेश के बाद निगमायुक्त पांच करोड़ की मौजूदा शक्तियों के अतिरिक्त इन परियोजनाओं को मंजूर कर सकेंगे।हाल ही में हुई पीएमओ की एक बैठक में दिल्ली के कूड़े के पहाड़ लैंडफिल साइटों को खत्म करने में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। विदित हो कि दिल्ली में पहले लैंडफिल साइटों को खत्म करने की योजना 2026 तक थी, लेकिन स्थायी समिति के गठन में हो रही देरी की वजह से अब इनकी समय-सीमा दिसंबर 2028 हो गई है।इसकी वजह लैंडफिल साइटों पर पड़े कचरे के निस्तारण के लिए नए टेंडर न होना था। निगम ने टेंडर प्रक्रिया को एक बार बीते वर्ष पूरा कर लिया था लेकिन स्थायी समिति की मंजूरी न मिलने की वजह से टेंडर की वैधता अवधि खत्म हो गई थी। निगम ने अब फिर से टेंडर प्रक्रिया को पूरा कर लिया है।अगर एलजी से निगमायुक्त को शक्ति नहीं मिलती तो लैंडफिल साइटों से 30-30 लाख टन कचरे निस्तारण के टेंडर की वैधता फिर खत्म हो जाती। निगम ने सेंट्रल जोन में घर-घर से कचरा उठाने का कार्य भी कंपनी की बिना मंजूरी के लिए उसकी कार्यावधि बढा दी है। जबकि बीते वर्ष सितंबर में ही उसकी निविदा का कार्यादेश खत्म हो गया था।राजनिवास ने इस मामले में दिल्ली के शहरी विकास मंत्री पर इस मामले में अडिय़ल रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। राजनिवास के अनुसार 24 जुलाई 2024 को इस संबंध में शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज को निगमायुक्त की शक्तियां बढ़ाने संबंधी फाइल भेजी थी।राजनिवास के अनुसार बिना किसी कारण के भारद्वाज ने अपने स्तर पर इस फाइल को लंबित रखा। इसकी वजह से निगम की सेवाएं बुरे तरीके से प्रभावित हुई। एलजी ने ट्राजेक्सन आफ बिजनेस रूल 19(5) का हवाला देते हुए सौरभ भारद्वाज से दो बार फाइल वापस मंगवाई, लेकिन अभी तक फाइल नहीं भेजी गई।अंत में विकट परिस्थितियों को देखते हुए एलजी ने छह परियोजनाओं को मंजूर करने की वित्तीय शक्ति निगमायुक्त को सौंपने को मंजूर सीएम के अनुमोदन से कर दिया है।हालांकि सौरभ भारद्वाज पर राजनिवास के बयान को लेकर आप ने पलटवार किया है। आप ने जारी एक बयान मे कहा है कि छह सितंबर को सौरभ भारद्वाज के पास यह फाइल आई और उसी दिन स्वीकृत कर दिया था। ऐसे में एलजी को बताना चाहिए कि उसी दिन इस पर काम क्यों नहीं किया गया। क्या एलजी इस फाइल में विलंब करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। एलजी साहब की निष्क्रियता यह साबित करेगी कि फाइल उनके मौखिक निर्देश पर देरी की गई।