
कोरबा। नगर पालिका परिषद दीपिका के लिए हो रहे चुनाव में अध्यक्ष पद के लिए चार अभ्यर्थियों ने नामांकन दाखिल किए हैं जो जांच पड़ताल में सही पाए गए । नाम वापसी का आज अंतिम दिवस है। इस बीच स्वतंत्र उम्मीदवारों को मैदान से हटाने के लिए दबाव तेज हो गया है। जानकारों का कहना है कि अगर तस्वीर नहीं बदलता है तो भाजपा और कांग्रेस के अध्यक्ष पद उम्मीदवारों के लिए मुश्किल खड़ी होना स्वाभाविक है।
दिलीप और गांधी ने स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर नामांकन दाखिल करने के साथ शुरुआती स्तर पर प्रमुख प्रत्याशियों का टेंशन बढ़ा दिया है। नगर पालिका परिषद दीपिका से भाजपा ने राजेंद्र राजपूत और कांग्रेस ने विशाल शुक्ला को अपना उम्मीदवार बनाया है। इन दोनों के लिए अब तक का पहला अध्यक्ष पद का चुनाव है। इन प्रत्याशियों के साथ-साथ संगठन को नगर पालिका परिषद दीपिका के इस चुनाव से काफी उम्मीद है। राजनीतिक महत्वाकांक्षा के अलावा दीपिका के विस्तार और भविष्य की संभावनाओं को लेकर चुनाव को काफी अहमियत दी जा रही है। और शायद यही कारण है कि अध्यक्ष पद का प्रत्याशी चुने जाने को लेकर दोनों पार्टियों ने जमकर मशक्कत की और बड़े स्तर पर लाबिंग करने के बाद नाम को अंतिम रूप दिया गया। प्रमुख दल इस बात को लेकर एश्योर थे कि मुकाबला आमने-सामने का होगा और स्थानी पकड़ के आधार पर वे अपनी स्थिति को मजबूत कर पाने में सफल होंगे लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है।
कहा जा रहा है कि तीसरे मोर्चे की उपस्थिति और पिछले कुछ समय से उसकी सक्रियता ने स्थानीय राजनीतिक परिदृश्य को बदलने का काम किया है। लोगों की सोच में भी अंतर साफ नजर आ रहा है। इसके अलावा और भी ऐसे कारण है जो लोगों को नए तरीके से सोचने के लिए मजबूर करते हैं। निर्दलीय प्रत्याशियों का मैदान में उतरना इसी का एक इशारा है। इसलिए प्रमुख दलों और उनके प्रत्याशियों के लिए यह चुनाव प्रतिष्ठा का विषय बन गया है लेकिन मौजूदा स्थिति में उनका टेंशन बढ़ा हुआ है। चुनाव प्रचार के लिए भले ही व्यय सीमा निर्धारित की गई है लेकिन जिस तरीके से तिकड़म जुटाए जा रही है उससे लगता है कि सभी प्रकार के विश्लेषण हाशिये पर चले जा रहे हैं।