
यही स्थिति भाजपा प्रत्याशी पटेल के सामने
कोरबा/कटघोरा। समय के साथ-साथ हर चुनाव में न केवल समीकरण बदल रहे हैं बल्कि बड़ी पार्टियों के उम्मीदवारों के लिए परेशानी का कारण भी बनते जा रहे हैं। लोगों की जागरूकता के कारण ऐसे हालात निर्मित हो रहे हैं। कटघोरा विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा विधायक और कांग्रेस प्रत्याशी पुरुषोत्तम कंवर की परेशानी लोगों के सवाल से बढ़ी हुई है। लोग पूछते हैं कि चुनाव में उनकी याद आई, बाकी समय थे कहां।
कांग्रेस की ओर से कटघोरा क्षेत्र के लिए इस बार सामान्य वर्ग के कई कार्यकर्ताओं ने टिकट की मांग की। कई स्तर पर दबाव बनाया। पिछले वर्षों में संगठन के लिए अपनी भूमिका की जानकारी दी। इन सबके बावजूद ऐसे कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया गया और अंत में फिर से मैदान में उतार दिया पुरुषोत्तम कंवर को, जिन्होंने पिछला चुनाव यहां से जीता था। यही कारण है कि चुनाव में दावेदार नाराज हैं और उनके समर्थक भी। रही-सही कसर विधानसभा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में जनता कर रही है। खबर के मुताबिक अनेक इलाकों में चुनाव प्रचार के दौरान विधायक को लोगों की ओर से आने वाले सवालों के जवाब देते नहीं बन रहा है। इनमें लोग पूछते हैं कि चुनाव में चेहरा दिखाने आ गए हैं। बीते पांच साल में थे कहां। सबसे अधिक समस्याएं कोयला खदानों के आसपास में बसे ग्रामों से है, जिनका समाधान न तो हुआ और न ही रूचि ली गई। लोग पूछते हैं कि ब्लास्टिंग से लेकर विस्थापन और नौकरी के लटके हुए मामलों में जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी भूमिका क्या रही। यथासंभव जवाब देने का काम हो भी रहा है लेकिन जनता इतने मात्र से संतुष्ट नहीं।
बताया जाता है कि क्षेत्र में इस तरह की विचित्र परिस्थितियों ने विधायक को परेशान कर रखा है। ऐसे में उनका चुनाव प्रबंधन देखने वाला वर्ग भी उलझन में है कि आखिर क्या किया जाए। खबरों में कहा गया कि भाजपा ने जिला पंचायत के सदस्य प्रेमचंद पटेल को नए चेहरे के रूप में यहां से उतारा है, जिनकी स्थिति भी बहुत ज्यादा अनुकूल नहीं कही जा रही है। नए चेहरे के रूप में उन्हें पसंद भले ही किये जा रहे हैं लेकिन अधिकतम क्षेत्र में नहीं पहुंच पाने और सभी रणनीति की कमी से मैनेजमेंट के सामने चुनौतियां हैं। यही सब कारण है कि विधानसभा क्षेत्र में इस बार क्षेत्रीय पार्टियों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार अपने-अपने मुद्दों के साथ मतदाताओं तक पैठ बनाने और मौके का फायदा लेने में लगे हैं। विधानसभा चुनाव के लिए होने वाले मतदान के लिए एक सप्ताह का समय रह गया है। इस दौर में साम-दाम-दंड-भेद के मामले में जो आगे होगा, निश्चित रूप से फायदा उसे हो सकता है।























